शनिवार, 12 जुलाई 2008

अब शुद्ध वायु भी बिकने लगी


इस देश में सब कुछ बिकता है, बोलो खरीदोगे? आपने न जाने क्या-क्या खरीदा होगा, पर शायद शुद्ध हवा कभी नहीं खरीदी होगी, पर अब आप हवा भी खरीदेंगे,यह तय है,क्योंकि इसे बेचने का धंधा फलने-फूलने लगा है। वैसे आपने जब भी अपने वाहन में हवा भराई होगी, निश्चित ही उसके दाम तो दिए ही होंगे, यह उस हवा के बिकने का छोटा रूप है। लेकिन अब शुद्ध वायु आप खरीदने के लिए विवश होंगे, यह एक ऐसा सच है, जिसे अभी तो नहीं, पर कुछ समय बाद आप स्वीकार करेंगे ही।
प्रदूषण के जाल में फँसी हुई शहरी हवा अब साँस लेने लायक नहीं रह गई है। शहरों में एक तरफ कारखानों से निकलता धुऑं और दूसरी तरफ वाहनों से निकलता धुऑं हवाओं में कार्बन डाइऑक्साईड, कार्बन मोनोऑक्साईड, सल्फर डाइऑक्साईड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रिक ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों का अनुपात बढ़ा रहा है। सिगरेट पीने के कारण फेफड़ों को जितना नुकसान होता है, उससे कहीं अधिक नुकसान राह चलते वाहन से निकलने वाले धुएँ से होता है। निरंतर इस जहरीले वातावरण में साँस लेने के कारण ये जानलेवा गैस हमारे शरीर में प्रवेश करती है। यही कारण है कि आज शहर में बसने वाले करोड़ाें लोग अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सर्दी-खाँसी, जुकाम आदि श्वसनतंत्र से जुड़े रोगों से पीड़ित हैं। इस प्रदूषित हवा से बचने के लिए लोग शहर से दूर कुछ समय के लिए जाते तो हैं, लेकिन वहाँ भी इनसे छुटकारा मिलना नामुमकिन ही है। यही कारण है कि आज शहर का संपन्न वर्ग प्रदूषित हवा के जहरीले वातावरण से बचने के लिए ऑक्सीजन पार्लर में जाना पसंद करता है।
हमारे यहाँ के महानगर दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु में ऑक्सीजन पार्लर खुल गए हैं। इस पार्लर में एयर कंडिशनर वातावरण में शुद्ध प्राणवायु लेने की सुविधा दी जाती है। पार्लर के संचालक ऐसा दावा करते हैं कि शुद्ध ऑक्सीजन शरीर में जाने के कारण थकान और तनाव से मुक्ति मिलती है और शरीर के उत्तकों को नवजीवन प्राप्त होता है। इन पार्लरों में 30 मिनट शुद्ध हवा साँसों में भरने के लिए 200 से 300 रुपए की फीस निर्धारित की गई है। स्पष्ट है कि इसका लाभ धनिक वर्ग ही ले सकता है। इस संबंध में वैज्ञानिकों का कहना है कि 100 प्रतिशत ऑक्सीजन श्वास में लेने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है, ऐसा साबित नहीं हो पाया है। वास्तव में इस शुद्ध वायु के कारण स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुँच सकता है।

डॉ. महेश परिमल
ऑक्सीजन बार का यह उद्योग अरबों डॉलर का है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में हाल ही में 'ब्लू कॉम ब्लू' नाम से ऑक्सीजन बार खोला गया है। इस बार में ऑक्सीजन वायु को विविध प्रकार के सुगंधयुक्त तेलों से होकर परिष्कृत किया जाता है। इस बार का मालिक लोरेन्ट फ्रांस में एक साइकिल की प्रतिस्पर्धा देखने गया था, उसने देखा कि साइक्लिंग करने से थके हुए प्रतियोगी ऑक्सीजन बोतल का उपयोग कर फिर से तरोताजा हो जाते थे और दुगुने जोश से फिर स्पर्धा में भाग लेते थे। लोरेन्ट को लगा कि इस प्रकार ऑक्सीजन वायु का उपयोग करने से शरीर के स्नायुओं को ताकत मिलती है और उसने ऑक्सीजन बार खोलने का विचार किया। इस पार्लर में हवा को फिल्टर करने का मशीन लगाया गया है, जिसमें से 95 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन मिल सकती है।
फ्रांस का यह ऑक्सीजन बार एक ब्यूटीपार्लर के अंदर शुरू किया गया है। ग्राहक जब मेनीक्योर या पेडीक्योर की ट्रीटमेन्ट करवाते हैं, उस वक्त 15 मिनट के लिए ऑक्सीजन की नली नाक में लगाए रखते हैं। इस पार्लर में 6 प्रकार के सुगंधित तेलों में से ऑक्सीजन को निकाला जाता है। ये सारे तेल ऑर्गेनिक पध्दति से बनाए जाते है। इसके माध्यम से विविध रोगों के उपचार का दावा किया गया है। इस बार में ऑक्सीजन लेने के लिए 10 यूरो अर्थात लगभग 600 रुपए देने होते हैं। तो यहाँ से शुरू हुआ ऑक्सीजन बार का यह महँगा खेल धीरे-धीरे हमारे भारत में भी अपने पैर पसारने लगा है।
मुंबई के दादर में सन 2000 में 'ओ-टू' नाम से ऑक्सीजन बार खोला गया था। इस बार में 20 मिनट ताजी हवा लेने की कीमत 200 रुपए है। यहाँ भी फ्रांस जैसी ही सुगंधित तेलयुक्त ऑक्सीजन वायु की सुविधा ग्राहकोें को प्राप्त होती है। मुंबई की हवा में मात्र 18 प्रतिशत ऑक्सीजन होने का प्रमाण मिलने के बाद स्वास्थ्य के प्रति सचेत धनिक वर्ग इस बार में जाकर ऑक्सीजन वायु का उपयोग करते हुए देखे जा सकते हैं।
चिकित्सकीय दृष्टि से देखा जाए तो हमारे शरीर की कोशिकाएँ ऑक्सीजन के लिए शर्करा का दहन करके उर्जा प्राप्त करती हैं। कोशिकाओं का विभाजन और वृध्दि होने की प्रक्रिया में भी ऑक्सीजन की मुख्य भूमिका होती है, किंतु ऑक्सीजन के साथ अन्य गैस भी उसमें मिली हुई होनी चाहिए। जिस व्यक्ति का ऑपरेशन करना होता है, उसे अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार जो लोग साइक्लिंग जैसी शारीरिक श्रम की स्पर्धा में भाग लेते हैं, उन्हें भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। आशय यह है कि स्वस्थ व्यक्ति को 100 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन देने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है, ऐसा चिकित्सा विद्वानों का कहना है।
जो लोग ऑक्सीजन बार से होकर आए हैं, ऐसे लोगों से जब उनके स्वास्थ्य के संबंध में बातचीत की गई तो उल्टी प्रतिक्रिया ही सामने आई। मल्टी नेशनल कंपनी के एकीक्यूटिव अपने अनुभव बताते हुए कहते हैं कि ऑक्सीजन लेने के कारण मुझे बैचेनी होने लगी। कितने लोगों ने 20 मिनट तक ऑक्सीजन लेने के कारण नाक और पेट में दर्द होने की शिकायत की। कितने लोगाें ने दर्द की शिकायत तो नहीं कि पर कोई फायदा महसूस न होने की बात कही। हकीकत में ऑक्सीजन बार के वातानुकूलित, सुगंधित और हल्के संगीत से बना वातावरण दिल और दिमाग को उस समय तक सुकून देता है। 20 मिनट तक इस वातावरण में रहने के कारण वैसे भी व्यक्ति का तनाव दूर हो जाता है और उसे ताजगी का अनुभव होता है।
चिकित्सक की मानें तो जिन्हें फेफड़ों की तकलीफ है या जिनके फेफड़ें कमजोर हैं, यदि वे लोग 100 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन लेते हैं तो उस स्थिति में उनके फेफड़ों को नुकसान पहुँच सकता है। अत: वे लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से 100 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन लेने की सलाह बिलकुल नहीं देते हैं।
भारत में जितने भी ऑक्सीजन बार महानगरों में खोले गए हैं, उसे सरकार की तरफ से सहमति या लाइसेंस नहीं दिया गया है। भारत में नर्सिग होम या हॉस्पीटल खोलना हो, तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की सहमति लेना और नीति-नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। ऑक्सीजन बार के मामले में ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। यही कारण है कि चिकित्सकीय ज्ञान न रखने वाला आम व्यक्ति भी इस प्रकार के बार खोल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकता है। रोजगार के नए अवसरों में ऑक्सीजन बार एक लाभकारी अवसर के रूप में अपने पैर जमा रहा है।
डॉ. महेश परिमल

1 टिप्पणी:

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