शुक्रवार, 7 मई 2010

मॉं

माँ पर श्री अनिल गोयल, भोपाल की कुछ कवितायेँ ....... पढने, समझने और कुछ करने के लिए


















6 टिप्‍पणियां:

  1. यक़ीनन मां के क़दमों के नीचे जन्नत है...
    जो मां की क़द्र नहीं करते वो बहुत ही बदनसीब लोग हैं...
    एक बच्चे के लिए...मां इस ज़मीं पर ईश्वर का ही प्रतिनिधित्व करती है...

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  2. sahi he ma ma he ma ka dil waqy me pyar or dular bhara ahsas he

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  3. दुनिया की सभी माताओं को नमन!!


    बहुत दिल को छूती हुई क्षणिकायें.

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  4. ओह! बहुत भावप्रवण कविताएं।

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  5. जो माँ की कदर नहीं करते वो जिन्दा होकर भी मुर्दे से भी बदतर होते हैं. जिसने माँ को नहीं पहचाना उसने भगवान को नहीं माना. ऐसे बदनसीब इंसान कहलाने के काबिल भी नहीं है. दिल पसीज उठा उन मों के लिए जिनकी औलादें ऐसी नाकारा हो गई.

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