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11:20 am
डॉ. महेश परिमल
मोदी सरकार के सामने संकट की घड़ी है। एक तरफ मानसून का कमजोर होना और दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल रिजर्व फेडरल बैंक(फेड) द्वारा आगामी 16 एवं 17 सितम्बर को होने वाली बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की आशंका है। इन दोनों कारकों के कारण इस हफ्ते बाजार में काफी उथल-पुथल देखी जा सकती है। फेड यदि ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करता है, तो ग्लोबल स्तर पर सोने की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा होने पर घरेलू मार्केट में सोना 2000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो सकता है। इसके अलावा इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती की उम्मीद, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम और चीन से घटती डिमांड सोने की कीमतों पर दबाव बना सकते हैं। शुक्रवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 26,460 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। यानी ये दाम 25 हजार से नीचे आ सकते हैं। मद्रास ज्वेलर्स एंड डायमंड मर्चेंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जयंतीलाल जे चेल्लानी ने बताया कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से घरों में रखा सोना बाहर आएगा, जिससे ग्लोबल मार्केट में डिमांड घटेगी और कीमतों में गिरावट आएगी। ऐसा होने पर ज्वेलर्स की बिक्री बढ़ेगी और कमाई इजाफा होगा। इसके अलावा देश पर एक और समस्या मंडरा रही है, वह है पेयजल की समस्या। कम बारिश से यह तो तय है कि लोगों ने पानी का अपव्यय कम नहीं किया है। हजारों नारों के बाद भी पानी के अपव्यय करने में किसी प्रकार की लगाम नहीं लगाई जा सकी है। मानसून ने जो आमद दिखाई थी, वह अब पूरी तरह से भ्रम साबित हुआ है। इसलिए देश में पीने के पानी का संकट मंडराने लगा है। लोग इससे अभी भले ही अनजान हों, पर गर्मी के पहले पानी को लेकर होने वाली जंग ही बता देगी कि यह समस्या कितनी विकराल साबित होगी। महंगाई पर किसी तरह का अंकुश न होने के कारण लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि करेंगे, यह तय है। देश के लिए यह अभी अग्निपरीक्षा का दौर है।
अमेरिकी सेंट्रल बैंक (फेड)  की नजर भारतीय बाजार पर है। वह भारतीय आर्थिक तंत्र का गहराई से अध्ययन कर रहा है।  अमेरिकी अर्थतंत्र ब्याज दर बढ़ाने के नाम पर दो भागों में विभाजित हो गया है। एक वर्ग का कहना है कि ब्याज दर बढ़ाई जानी चाहिए। इनका तर्क है कि डॉलर अब मजबूत हो गया है, इसलिए ब्याज दर बढ़ाने से देश को फायदा होगा।  देश में लगातार दूसरे साल सूखे जैसे हालात हैं। ऐसा भारत के 115 साल के इतिहास में चौथी बार होने जा रहा है। 1 जून से 10 सितंबर तक देशभर में 664.3 मिमी बारिश हुई है, जो कि सामान्य के मुकाबले 15 फीसदी कम है। साउथ इंडियन रीजनल गोल्ड फेडरेशन के प्रमुख पद्मनाभन ने बताया कि बारिश कम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से सोने की मांग घटी है। इसके कारण देश में सोने का इंपोर्ट 10 फीसदी घटने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60 फीसदी से अधिक सोने की खपत होती है। इसके अलावा प्रमुख करंसी के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 96 अंक के करीब पहुंच गया है। अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों के कारण डॉलर में तेजी देखने को मिल रही है। पैराडाइम कमोडिटी के सीईओ बीरेन वकील ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान डॉलर इंडेक्स में 14 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है। वकील के मुताबिक अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ीं, तो डॉलर इंडेक्स 100 के पार पहुंच सकता है। इसके कारण सोने की कीमतों में गिरावट की आशंका है।
यह तो देश का एक साधारण आदमी भी जानता है कि मानसून यदि अच्छा होता है, तो देश का आर्थिक तंत्र भी मजबूत होता है। मानसून का कमजोर होना अकाल की संभावनाएँ बढ़ा देता है। वैसे देश के पास अनाज का पर्याप्त स्टॉक है, इसके बाद भी अनाज की वितरण व्यवस्था ठीक न होने के कारण यह अनाज सही हाथों तक पहुंच पाएगा, इसमें शक है। यह तो इसी बात से पता चलता है कि देश में पेट्राेल-डीजल के दाम बढ़ते ही महंगाई बढ़ जाती है, पर जब उनके दामों में कमी आती है, तो महंगाई कम नहीं होती। अब सरकार कमजोर मानसून के नाम पर महँगाई का एक और डोज देने के लिए तैयार हो रही है। बाजार का संकेत अब अर्थशास्त्री ही नहीं, बल्कि आम आदमी भी समझने लगा है। कम बारिश से महंगाई बढ़ती है,आवश्यक वस्तुओं की कमी होने लगती है। काफी समय से बाजार मंदी की चपेट में है। एक तरफ लोग बाजार में तेजी की आशा लिए बैठे हैं, तो दूसरी तरफ मंदी और अधिक तीव्र होने लगी है। अच्छे दिन की बात अब हवा होने लगी है। अमेरिका में रोजगार के अवसर बढ़ने लगे हैं। लोगों को नई नौकरियां मिलने लगी है। बेरोजगारी कम होने लगी है। इससे अमेिरका का अर्थतंत्र एक बार फिर सजग होकर उठ बैठा है। इसलिए ब्याज बढ़े, इसकी संभावना बढ़ गई है।
वैश्विक आर्थिक तंत्र छोटी-छोटी बाबतों पर आधारित है। हाल में भारत के उद्योगपतियों और प्रधानमंत्री के बीच बैठक हुई थी, तब ब्याजदर घटाने का मामला भी उठा था। भारत के उद्योगपति इस मुद्दे पर आगे बढ़ना चाह रहे थे। वे प्रधानमंत्री से इस बात की गारंटी चाहते थे कि ब्याजदर घटाई जाए। िकंतु प्रधानमंत्री ने इसे रिजर्व बैंक के ऊपर डाल दिया। इससे चर्चा का रुख ही बदल गया। ब्याज दर के मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली और रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बीच शीत युद्ध जारी है। भारत में ब्याजदर घटाने की मांग की जा रही है, तो अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाने की मांग की जा रही है। बारिश कम होने से उत्पादन पर असर होगा। कुछ लोगों का मानना है कि अगले दस दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो यह तय है कि आम जनता की दीवाली बिगड़ जाएगी। इस समय त्योहार के बाद भी बाजार ठंडा है। व्यापारी सेल की तख्ती दुकानों में लगाए बैठे हैं। पर ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे हैं। 16-17 की बैठक में जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसका पूरा असर भारतीय बाजारों में दिखाई देगा। फिर वह चाहे उद्योग जगत हो या शेयर बाजार। कमजाेर बारिश से देश के 90 प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं, यह तय है। फेड के निर्णय के बाद यदि सोना 2000 रुपए सस्ता होता है, तो इसका असर सेंसेक्स बहुत बड़ा झटका देगा।  यह भारत का दुर्भाग्य है कि विश्व बाजार में क्रूड आइल का दाम कम होता है, ताे डॉलर मजबूत होता है, यदि इस समय डॉलर के दाम 58 रुपए होते हैं, तो देेेेश में पेट्रोल-डीजल आयात करना सस्ता हो जाएगा। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। सरकार का पूरा प्रयास है कि क्रूड आइल के कम होते भाव से रुपया मजबूत हो। मुकेश अंबानी, सायरस मिस्त्री, कुमार मंगलम, बिड़ला, सुनील भारती मित्तल जैसे उद्योग जगत के बाहुबलि अधिक निवेश के लिए सहमत हों और सरकार पर भरोसा रखें, तो परिस्थितियां पलट सकती हैं।
डॉ. महेश परिमल

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