अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

5:46 pm
जिसने कभी रोशनी से साक्षात्‍कार नहीं किया, वह एक प्राध्‍यापक भी हो सकता है। इसके अलावा वो पी.एच-डी. भी कर सकता है और वह भी गिरीश कर्नाड के नाटकों पर। ऐसे शख्‍स को भला आप क्‍या कहेंगे? डॉ. रोहित त्रिवेदी ही वह शख्‍स हैं, जिन्‍होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो सक्षम लोग भी मुश्‍ि कल से कर पाते हैं। वे आज के युवाओं की प्रेरणा हैं। जानिए उन्‍हीं के बारे में...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.