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निदा फ़ाज़ली ने इस फ़ानी दुनिया को रूखसत कर दिया लेकिन उनकी याद हमारे दिलों में बनी रहेगी। अपनी नज्मों के साथ वे हमेशा हमारे बीच रहेंगे। निदा अगली पीढ़ी के शायर थे। उनके दिल में मीर, मीरा, तुलसी, रहीम, कबीर एक साथ धड़कते थे। उनकी लेखनी में जमीनी सोचवाले शब्द फूटते थे। शायरी ऐसी जिसे हर कोई समझ जाए। परंपरा में रहकर कलम चलाते थे। जिसमें दोहे, नज्म, ग़ज़ल सभी का समावेश है।

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