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डॉ. श्रीराम परिहार का यह ललित निबंध हमारे निराश मन-मस्तिष्क को एक नई ऊर्जा से भर देता है। आशा संघर्ष पथ की प्रेरणा है। नियति की जकड़नों और विडम्बनाओं से वही उबारती है। आशा के सहारे ही व्यक्ति पहाड़ जैसी जिंदगी काट लेता है। पेड़ वसंत की आशा में पतझड़ की मार सह लेता है। आशा के भी अलग-अलग तेवर होते हैं। अलग-अलग किस्म का जुझारूपन होता है। यही आशा हमारे जीवन की कठिनाइयों में हमारा मार्ग प्रशस्त करती है ...

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