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पहाडि़यों से घिरा एक गाँव था - बंसीनगर। वहाँ के लोग खेती करते थे और पशु पालते थे। गाँव के लोग बहुत सीधे-सादे थे, लेकिन गाँव का मुख‍िया बहुत ही क्रूर और लालची था। वह जरा-जरा सी बात पर लोगों की कोड़े से पिटाई कर देता था। एक बार मौसम खराब होने के कारण किसानों की फसल नष्ट हो गई। उनके पास इतना अनाज नहीं था कि वे मुखिया को लगान के तौर पर देते और अपना पेट भी भरते। उन्होंने इस बार मुखिया को अनाज नहीं दिया। जिससे मुखिया नाराज हो गया। गाँव के लड़के सुखदेव के दादा ने जब लगान न देने का कारण बताया तो उसे कोड़ों से पिटा गया। बेचारे दादा की चोट खाकर हालत खराब हो गई। सुखदेव को इस बात का बहुत दुख हुआ। गाॅंव वाले भी उन्हें बचाने के लिए सामने नहीं आए। क्या सुखदेव अपने दादा और गाँव के अन्य लोगों के दुख दूर कर पाया, क्या वह लोागों को मुखिया के अत्याचार से बचा पाया, क्या मुखिया को अपनी गलती का अहसास हुआ, क्या उस गाॅव के लोगों के जीवन में खुशियाँ आई, फिर ये गुफा का क्या रहस्य था, जो कहानी का शीर्षक ही ये रखा गया, ये सारी ज‍िज्ञासा का समाधान जानने के लिए सुनिए कहानी, खाली गुफा...

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