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कहानीकार परशुराम संबल की यह बाल कहानी जर्मनी के सम्राट जोसेफ द्व‍ितीय की दयालुता का परिचय देती है। वे एक शासक होकर भी अपनी प्रजा के छोटे-से छोटे दुख से दुखी हो जाया करते थे और उसे दूर करने का हर संभव प्रयास करते थे। उनकी दयालुता के चर्चे प्रजा की जबान पर थे। ऊंच-नीच का भेदभाव नहीं, धन-दौलत का लालच नहीं और अमीर-गरीब का कुटील व्यवहार नहीं, ये सारी उनकी स्वभावगत विशेषता थी, जिसके कारण उन्होंने एक गरीब परिवार की मदद की और एक नन्हे बालक को भिखारी बनने से बचा लिया। यह कहानी ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है। तो सुनिए कहानी- अनोखी दवा...

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