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7:24 pm
घुड़सवार सैनिक चंद्रदत्त के निकट आ चुके थे और घोड़े की लगाम थामे राजकुमार के आदेश की प्रतीक्षा में खड़े थे। सैनिकों की निगाहें भी पेड़ पर लटकते नरकंकालों पर जा टिकी थी, पर किसी ने कुछ न पूछा और न राजकुमार ने कुछ बताया। चंद्रदत्त ने भुजा हवा में लहराई और संकेत किया - आगे बढ़ चलो। आगे-आगे राजकुमार और पीछे-पीछे उसके सैनिक। अभी कुछ ही दूर बढ़े होंगे कि सामने एक नदी लहराती हुई दिखाई पड़ी। उसकी तरंगे जोर-जोर से दोनों किनारों से टकराकर घोर गर्जना कर रही थी। पहाड़ी नदी को इस भयानक बाढ़ में पार करना असंभव था। फिर भी राजकुमार आगे बढ़ता गया.. बढ़ता गया। वो कहाँ जा रहा था और किस लिए जा रहा था, उसे सफलता मिली कि नहीं, उसके साथ कौन था, उसे और कितनी मुसीबतों का सामना करना पड़ा, ये सारी बातें जानने के लिए सुनिए कहानी, चलो आगे...

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