मंगलवार, 8 मार्च 2016

महिला दिवस पर विशेष कविता

एक कलाकार अपनी कला को नाम जरूर देता है। एक रचनाकार की रचना भी उसके नाम से पहचानी जाती है लेकिन भारतीय संस्कृति में एक नारी ही ऐसी रचनाकार है जो अपनी रचना को नाम नहीं दे पाती है। उसकी सृजन कृति उसकी कोख से जन्म जरूर लेती है लेकिन उसे नाम पिता का ही मिलता है। जब हम स्वयं को ये अधिकार दे देंगे कि संतान के साथ माता का नाम ही संवैधानिक रूप से जोड़ा जाए तभी वो सही अर्थों में महिला दिवस होगा। महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है यह कविता...

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर लगी कविता ..
    सामयिक प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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