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उर्दू के मशहूर शायर नज़ीर अकबराबादी ने लगभग 95 वर्ष की आयु भोगी और सच्चे अर्थों में भोगी। एश-ओ-आराम से न रहने पर भी उन्होंने जीवन का पूरा आनंद लिया। संसार की तथाकथित छोटी से छोटी बातों में भी पूरी दिलचस्पी ली और उन सभी बातों को इस तरह सामने रख दिया कि लोग भी जीवन का पूर्ण उपयोग कर सकें। उन्होंने जन्म से लेकर मरण पर्यन्त पूरे जीवन का इस उत्साह के साथ अपनी शायरी में वर्णन किया है कि यह वर्णन कहीं और नहीं मिलता। उनकी शायरियों को यदि सहेजकर रखा गया होता तो उनकी संख्या दो लाख से भी अधिक होती, किंतु अफसोस लगभग 6 हजार शे'र ही उपलब्ध हो पाए हैं। वह भी उनके शिष्यों की उदारता का ही परिणाम है।

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