अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

4:41 pm
डॉ. महेश परिमल
लगता है विवादों के साथ सलमान खान का अटूट रिश्ता है। यह भी कहा जा सकता है कि विवाद में रहना उनकी आदत में शुमार हो गया है। सलमान के खिलाफ हिट एंड रन से लेकर चिंकारे के शिकार को लेकर अदालतों में केस चल रहा है। शराब पीकर कार चलाने के मामले पर वे अभी तक पूरी तरह से निर्दोष साबित नहीं हुए हैं। क्योंकि अदालत के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत में अपील की है। इन हालात में रियो ओलंपिक के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने सलमान खान को भारतीय टीम का गुडविल एम्बेसेडर बनाकर इस विवाद को और छेड़ दिया है।
सोशल मीडिया में इस समय सलमान के समर्थन और उनके खिलाफ एक तरह से जंग ही छिड़ गई है। इस विवाद को एक तरह से सलमान की आने वाली फिल्म सुल्तान’ के प्रमोशन के साथ भी देखा जा रहा है। तय है इससे फिल्म को फायदा होगा। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि गुडविल एम्बेसेडर के रूप् में किसी विख्यात व्यक्ति को लिया गया है। सलमान के साथ अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान का भी नाम था। पर इन दोनों को छोड़कर केवल सलमान के नाम पर सहमति बनी। इंडियन ओलंपिक ऐसोसिएशन ने आखिर गुडविल एम्बेसेडर के रूप् में सलमान को ही क्यों चुनायह बात समझ में नहीं आ रही है। फिर भी यह तो कहा ही जा सकता है कि स्वयं सलमान ही इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के पास गुडविल एम्बेसेडर बनने के लिए गए थे। ऐसा एसोसिएशन के खुलासे में सामने आया है। एक और बात यह है कि सलमान में दर्शकों को खींचकर लाने की काबिलियत है। अधिक दर्शक आएंगेतो कमाई भी अच्छी होगी। यदि कमाई देने वाला व्यक्ति हैतो एसोसिएशन को सलमान के भूतकाल से कोई लेना-देना नहीं है। यानी सबसे बड़ा रुपैया वाली कहावत सलमान के मामले में भी फिट बैठती है।
बताया गया है कि इस काम के लिए सलमान खान एक पैसा भी नहीं लेंगे। पर ऐसा तो अमिताभ बच्चन ने भी किया है। गुजरात के ब्रांड एम्बेसेडर बनकर। यदि गुडविल एम्बेसेडर बनाने के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने सलमान का नाम तय कर लिया हैतो उसे कोई रोकने वाला भी नहीं है। उसे तो कमाई से मतलब हैउसके भूतकाल से नहीं। मिल्खा सिंह या योगेश्वर दत्त उतनी कमाई नहीं करा पातेजितनी सलमान करवा सकते हैं। इनका विरोध अपनी जगह ठीक है। पर इतना जान लो कि सलमान आदतन अपराधी नहीं हैं। अगर उनसे गुनाह हुआ हैतो वे उसकी सजा भी भुगतने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा सलमान के कई अच्छे पक्ष भी हैंजो यदा-कदा मीडिया पर आते रहते हैं। उनकी दानशीलतादयाशीलता,अच्छे व्यवहार आदि पर भी कई किस्से हैंयदि उन्हीं किस्सों को सामने लाया जाएतो वे भी एक सहृदय मानव हैं।
इस समय खेल जगत से सलमान को लेकर काफी टिप्पणियां आ रही है। कई खिलाड़ी सलमान के समर्थन में हैंउनका मानना है कि सलमान के गुडविल एम्बेसेडर बनने से पदक हासिल हो या न होपर युवाओं में खेल के प्रति रुझान बढ़ेगा। वैसे सलमान स्वयं भी एक अच्छे वेट लिफ्टर,साइकिलिस्टस्वीमर हैं। वे युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं। सलमान के विरोध में भी कई लोग आ खड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि सलमान अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए कहीं भी जा सकते हैंपर ओलंपिक के मैदान को वे हथियार नहीं बना सकते। खेल जगत और फिल्म जगत के बीच यह विवाद अभी और गहराएगाइसमें कोई दो मत नहीं। मिल्खा सिंह और योगेश्वर दत्त का कहना है कि किसी खिलाड़ी को ही गुडविल एम्बेसेडर बनाया जाना चाहिए। मिल्खा सिंह तो साफ कहते हैं कि उनका विरोध सलमान के प्रति नहीं है। उनका विरोध यह है कि किसी फिल्म स्टार को गुडविल एम्बेसेडर क्यों बनाया जाएउनकी जगह कोई खिलाड़ी ही ले सकता है। इस मामले में सलमान के पिता सलीम खान तो खुलकर सामने आ एग हैं। अब रजा मुराद भी सलमान के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि सलमान भारत के युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। वे युवाओं में खेल के प्रति रुझान पैदा करने में सक्षम हैं। एक कदम आगे बढ़ते हुए रजा मुराद तो यहां तक कहते हैं कि मिल्खा सिंह ने भारत के लिए कभी कोई ओलंपिक पदक नहीं जीता। भारत की नई पीढ़ी उन्हें भूल चुकी थी। यदि उनके नाम से फिल्म नहीं बनती, तो वे एक तेज दौड़ने वाले व्यक्ति के रूप में ही जाने जाते। फिल्म ने उन्हें नई पहचान दी है।
लंदन ओलंपिक्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले योगेश्वर दत्त इसमें किसी खेल की साजिश देख रहे हैं। ट्विटर पर कटाक्ष करते हुए वे कहते हैं कि सलमान खान को अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए कहीं भी जाने का अधिकार है, पर ओलंपिक इसके लिए उचित स्थान कदापि नहीं है। उन्होंने सवाल किया है कि सलमान खान को गुडविल एम्बेसेडर बना दिए जाने से क्या भारतीय टीम को और अधिक पदक मिल जाएंगे। योगेश्वर चाहते हैं कि सलमान के बजाए यदि मिल्खा सिंह या पी.टी. उषा को गुडविल एम्बेसेडर बना दिया जाता, तो बेहतर होता। सोशल मीडिया में इस मामले पर एक अभियान ही चल रहा है। विरोध करने वाले यह कह रहे हैं कि मुम्बई में शराब पीकर गाड़ी चलाने और राजस्थान में चिंकारे का शिकार के मामले में सम्बद्ध सलमान युवाओं को कैसी प्रेरणा देंगे? दूसरी तरफ सलमान के समर्थक कह रहे हैं कि सलमान स्वयं भी स्पोर्ट्समेन हैं। स्पोटर्समेन हैं। उन्होंने साइकिलिंग, स्विमिंग और वेट लिफ्टिंग की है। उन्हें भारत के गुडविल एम्बेसेडर बनने का पूरा अधिकार है। सलमान के समर्थन में भारतीय हॉकी टीम के केप्टन सरदार सिंह, भारत के शूटिंग स्टार अभिनव बिंद्रा, बॉक्सर मेरी काम, शतरंज चेम्पियन विश्वनाथ आनंद ने यही कहा है कि सलमान के नाम पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। ऐसे फिल्मी सितारों का नाम ओलंपिक से जुड़ने पर खेल की दुनिया को फायदा ही होगा।
कुछ भी हो, पर सच तो यह है कि इस बार सलमान खान के चयन को लेकर विवाद है। एक बात यह भी सामने आ रही है कि उन्होंने इस चयन प्रक्रिया में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान को पछाड़ा है। यह बात उनके समर्थकों को अच्छी नहीं लगी होगी, इसलिए वे भी विरोध कर रहे हैं। विरोध अपनी जगह है, पर विरोध का तरीका केवल तर्क तक ही सीमित रहे, तो ही बेहतर। यह विरोध हिंसा का रूप् न ले, यही कामना की जा सकती है।
डॉ. महेश परिमल
लेबल:

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.