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शायद इस दुनिया में माँ ही वह पहली व्यक्ति होती है जो किसी बच्चे को दुनिया में पहले- पहल के तमाम अनुभव से परिचित कराती है। चाहे देह हो या आत्मा, आग हो या पानी, वह कभी अपने बच्चों को भूखा नहीं सोने देती। माँ का होना भरे-पूरे संसार का होना है। उसकी अनुपस्थिति में उसका संसार हमें हमेशा घेरे रहता है। उसकी स्मृतियाँ हमें हमेशा किसी मुलायम आँचल की तरह लपेटे रहती हैं। कितनी ही बातें, नसीहतें, कितनी घटनाएँ और कितने सारे पाठ माँ से गहरे जुड़े होते हैं जिन्हें भुलाया जाना असंभव है। कई बार उन्हें व्यक्त करना असंभव होता है। और यही कारण है कि माँ पर लिखना भी बेहद मुश्किल होता है। फिर भी अनुराग अनंत अपनी माँ के प्र‍त‍ि उत्पन्न होती भावनाओं को शब्दों के माध्यम से व्यक्‍त करते हैं। उनकी इन्हीं भावनाओं को सुनकर अनुभव कीजिए ...

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