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12:47 pm
कहानी का कुछ अंश... दिन ठण्डा था। चार-पाँच महिलाएँ शर्मा जी की बैठक में बैठकर गपशप कर रही थीं। कुछ देर बाद मिसेज शर्मा चाय बना लाई। उन्होंने चाय कपों में उड़ेलते हुए कहा-”आप सभी पहले चाय लें। बातें बाद में। ठंड के दिनों में गर्म चाय ही अच्छी लगती हैं।” सभी ने कप उठा लिए और साथ में बिस्कुट भी। वे बिस्कुट कुतरते हुए चाय की चुस्की लेने लगी। परन्तु मिसेज शर्मा अभी कप उठा भी न पाई थीं कि उनके मोबाइल का अलार्म बज गया। वे उठी और बगल के कमरे में जाकर किसी को फोन लगाकर बातें करने लगी। इधर बहनें उनका इंतजार कर रही थीं और उधर वे फोन पर व्यस्त थीं। एक ने घड़ी की ओर देखा। वह बोली- “चार बज गए। भाभीजी आएं तो हम चलें। बच्चों का स्कूल से आने का समय हो रहा है।” दूसरी ने कहा- “हम ही कहाँ बहुत देर रूकने वाले हैं।” मिसेज शर्मा लौट आई। उनकी चाय ठंडी हो चुकी थी। रमा ने मजाक करते हुए कहा- “आपने सबको गर्म चाय पिला दी और आपकी ठंडी हो गई। अब हम चलते हैं। आप चाय गर्म कर आराम से पियें।” इसी समय शर्माजी भी सीढि़यों से उतरते हुए दिखाई दिए। एक सखी ने कहा- “देखिए आपका साथ देने शर्माजी भी आ गए हैं।” मिसेज शर्मा मजाक के मूड में नहीं थीं। वे बोली- “साथ किसी का भी मिले मेरे हिस्से में गर्म चाय और आराम है ही नहीं।” मिसेज वर्मा ने आश्चर्य से कहा- “क्यों नहीं है? दो बुजुर्ग लोग हैं आप। कौन सा अधिक काम है। आराम से बैठकर चाय पिया करें।” मिसेज शर्मा ने आहिस्ता से कहा- “काम अधिक नहीं हैं पर बिना काम के काम सैकड़ों हैं। कप में चाय डालते ही किसी को दवा याद आती है तो किसी को मोबाइल या पैन, कोई दरवाजा ही खटखटा देता है।” एक बहन ने हँसते हुए कहा- “और नहीं तो क्या! देखो अब अलार्म ही बज गया।” मिसेज वर्मा ने कौतुहल से पूछा- “इस समय अलार्म क्यों लगाया आपने? देखो अलार्म बंद करने गई और फोन भी आ गया। इसी सब में देर लगी और आपकी चाय ठंडी हो गई। आगे क्या हुआ जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...

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