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लेख का अंश... हिंदी फिल्मों के आरंभिक दौर के नायकों में अशोक कुमार एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने प्रचलित पारसी थियेटर के संस्कारों को ताक पर रखते हुए अपने सहज अभिनय के दम पर स्टारडम खड़ा किया। उन्होंने अपने आपको कभी भी एक ही छवि में बँधने नहीं दिया। दिलचस्प है कि शुरूआती दौर में फिल्मजगत में मौजूद रहने के बावजूद अशोक कुमार अभिनय करने के पक्ष में नहीं थे। इसलिए उन्हें जब जीवन नैया फिल्म में अभिनय करने का मौका मिला तो उन्होंने बड़े ही बेमन से काम किया। दरअसल अशोक कुमार की रूचि फिल्म जगत के तकनीकी पक्ष में थी और वे उसी में सफलता प्राप्त करना चाहते थे। किंतु किस्मत उन्हें अभिनय के क्षेत्र में ले ही आई और वे उस क्षेत्र में ऐसे आगे बढ़े कि बढ़ते चले गए। आज उन्हें हम अशोक कुमार एवं दादामुनि के नाम से जानते हैं। उनके अभिनय सफर की जानकारी इस लेख के माध्यम से सुनकर प्राप्त करते हैं…

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