अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

5:50 pm
जीवन छोटी-छोटी खुशियों का नाम है। दुख है, तभी सुख है। यद‍ि जीवन में यह दोनों ही नहीं है, तो जीने का मजा भी नहीं है। हमें खुशी का अहसास गम के आने के बाद ही होता है और गम का अहसास खुशी के जाने के बाद ही होता है। जीवन के हर क्षण काेे इस तरह जीएँँ कि वो एक प्रेरणा बन जाए। हमारे लिए भी और दूसरों के लिए भी। यही जीवन दर्शन का सिद़धांत है। जो इसके अनुसार जीवन जीता है, वह जीवन का भरपूर मजा लेता है और सफलताओं को अपने करीब पाता है। जीवन की सच्‍ची सफलता खुशियों में छिपी हुई है, हमारे भीतर की मुस्‍कान में छिपी हुई है। खुलकर जीने के लिए खुलकर हँँसना-हँँसाना दोनों जरूरी है। कुछ इसी तरह की बात इन लघुकथाओं में भी गंभीरतापूर्वक समझाई गई है। जिसका आनंद लीजिए, इस ऑडियो के माध्‍यम से...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.