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12:34 pm
कविता का अंश... मैंने तो एक किरण मांगी थी, तूूने तो दिनमान दे दिया, चकाचौंध भरी चमका का, जादू तडि़त सामान दे दिया। मेरे नयन सहेंगे कैसे, यह अमिताभा एेसी ज्‍वाला,मरूमाया की यह मरिचिका, तुहिन पर्व की यह वरमाला, हुई यामिनी शेष न मधु की, तूने नया विधान दे दिया, मैंने तो एक किरण मांगी थी, तूने तो दिनमान दे दिया। आगे की कविता ऑडियो की मदद से सुनिए...

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