अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

4:24 pm
लेख के बारे में... इस संसार में शक्ति का वर्चस्‍व है। शक्ति का ही राज है। शक्ति के बल पर ही मनुष्‍य संसार में विचरण करता है। विकास करता है और जीवन में सफलता प्राप्‍त करता है। अपनी शक्ति को बढ़ाने के लिए मनुष्‍य तरह-तरह के उपाय करता है। लेकिन क्‍या यह शक्ति हर समय हमारा साथ देती है, यह जरूरी नहीं है। जो आज शक्तिशाली है, वह आने वाले समय में कमजोर भी हो सकता है और जो आज कमजोर है, वह कल शक्तिशाली भी बन सकता है। हमारी आत्‍म शक्ति भले ही हमें बाहरी शक्तियों की तरह दिखाई नहीं देती, लेकिन हमारे व्‍यक्तित्‍व पर, हमारी सोच व क्रियाकलापों पर जबरदस्‍त प्रभाव डालती है। इसका प्रभाव भी बहुत दूरगामी होता है। इसी प्रभाव के बल पर सामान्‍य सा दिखनेवाला व्‍यक्ति भी अपनी अमिट छाप छोड़ता है। इस शक्ति के बल पर ही किसी भी तरह के संकट का वह मुकाबला करने से नहीं घबराता। विचलित होोना तो उसे आता ही नहीं। कठिन से कठिन परिस्थितियों का वह डटकर मुकाबला करता है। इसी आत्‍मशक्ति के सामने दुनिया के सारे ऐश्‍वर्य, सुख-सुविधाएँँ आदि महत्‍वहीन द‍िखाई देते हेैं। आइए जानते हैं, इस आत्‍मशक्ति की गहराई को इस ऑडियो के माध्‍यम से...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.