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11:56 am
प्रयाग शुक्ल हिन्दी के कवि, कला-समीक्षक, अनुवादक एवं कहानीकार हैं। ये साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार, शरद जोशी सम्मान एवं द्विजदेव सम्मान से सम्मानित हैं। यहाँ हम उनका दैनिक भास्कर में प्रकाशित आलेख :- हमारी जिंदगी में रोज घटता - उसने कहा था, काे ऑडियो के माध्यम से लेकर आए हैं। उसने कहा था, जैसी कालजयी रचना हमें किस प्रकार गहरी संवेदना से भर देती है। नि:स्वार्थ भाव से दूसरों के लिए प्राणों की बाजी लगा देने की, हमारे भीतर की क्षमता को तौलती है। इसी सच्चाई को इस लेख के माध्यम से व्यक्त किया गया है। आप भी इसका सुनकर आनंद लीजिए...

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