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11:56 am
कहानी का अंश... एक बार कि बात है कि एक गांव कंजूस सेठ रहता था। उसकी कंजूसी के चर्चे दूर-दूर तक मशहूर थे। उसके पास कोई भी जाना पसंद नहीं करता था। पड़ोस के एक गांव से एक युवक उस सेठ के पास नौकरी मांगने आया। सेठ ने कहा- नौकरी तो तुमको मिल जाएगी, लेकिन मेरी एक शर्त है, अगर तुम शर्त मानते हो तो काम मिलेगा वरना नहीं। उस युवक ने सेठ से शर्त पूछी। सेठ ने कहा- तुमको सुबह से लेकर शाम तक काम करना होगा। जो भी काम कहा जाएगा, वो करोगे। उसके बदले तुमको दो रुपये महीना और दिन में एक बार भोजन मिलेगा, वो भी किसी पेड़ के पत्ते पर पूरा भरकर। इस पर भी अगर तुम काम छोड़ कर गए तो मैं तुम्हारे नाक-कान काट लूंगा और अगर मैं तुमको निकालता हूं तो तुम मेरे नाक-कान काट सकते हो। बोलो शर्त मंजूर है। युवक मजबूर था, उसने सेठ की शर्त मंजूर कर ली। इसके बाद युवक सेठ के यहां रहकर काम करने लगा। कंजूस सेठ उस युवक से जमकर काम लेता। घर का काम, बाजार का काम, खेत का काम। युवक जब थक कर चूर हो जाता तो शाम को अपने लिए एक बर्गद के पेड़ का पत्ता तोड़ता और उस पर खाना मांगता। बर्गद के छोटे से पत्ते पर जरा सा खाना आता। पूरा पत्ता भरकर खाने के बावजूद वह भूखा रह जाता। धीरे-धीरे उस युवक की तबियत खराब होने लगी। बिना खाए काम करते-करते उसका शरीर कमजोर हो गया। एक-दो महीने के बाद उसके अंदर काम करने की ताकत खत्म हो गई। लेकिन अगर वो काम छोड़ता है तो उसको सेठ के हाथों अपने नाक-कान कटवाने पड़ेंगे। इस डर से वो काम करता रहा। लेकिन एक दिन उसको लगा कि अगर वो इसी तरह काम करता रहा तो वो मर जाएगा, और मरने से अच्छा है कि अपने नाक-कान कटवा लिए जाएं। इसलिए हारकर उसने सेठ से कहा- सेठ जी मैं काम छोड़ना चाहता हूं। सेठ ने ये बात सुनने पर अपनी शर्त दोहराई। युवक ने कहा- जैसा आप चाहो वैसा करो, लेकिन मुझे इस नौकरी से मुक्ति दो। सेठ ने चाकू से उस युवक के नाक काम काट लिए और उसको काम से निकाल दिया। फिर युवक ने अपना बदला उस कंजूस सेठ से किस प्रकार लिया तथा शेखचिल्ली ने उसकी मदद किस प्रकार की, कंजूस सेठ का क्या हाल हुआ, ये सारी बातें जानने के लिए आॅडियो की मदद लीजिए...

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