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सबसे प्यारे.... कविता का अंश... सूरज मुझको लगता प्यारा लेकर आता है उजियारा । सूरज से भी लगते प्यारे टिम-टिम करते नन्हें तारे। तारों से भी प्यारा अम्बर बाँटे खुशियाँ झोली भर-भर। चन्दा अम्बर से भी प्यारा गोरा चिट्टा और दुलारा। चन्दा से भी प्यारी धरती जिस पर नदियाँ कल-कल करती । पेड़ों की हरियाली ओढ़े हम सबके है मन को हरती । हँसी दूध –सी जोश नदी –सा भोले मुखड़े मन के सच्चे । धरती से प्यारे भी लगते खिल-खिल करते नन्हें बच्चे । इन बच्चों में राम बसे हैं ये ही अपने किशन कन्हाई । इन बच्चों में काबा-काशी और नहीं है तीरथ है भाई । एेसी ही प्यारी-प्यारी कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

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