अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

12:06 pm
पीछे की तरफ एक नजर... लेख के बारे में... तुम मेरी चिट्ठियों से ऊब गई होगी! जरा दम लेना चाहती होगी। खैर, कुछ अरसे तक मैं तुम्हें नई बात न लिखूँगा। हमने थोड़े-से खतों में हजारों लाखों बरसों की दौड़ लगा डाली है। मैं चाहता हूँ कि जो कुछ हम देख आए हैं उस पर तुम जरा गौर करो। हम उस जमाने से चले थे जब जमीन सूरज ही का एक हिस्सा थी, तब वह उससे अलग हो कर धीरे-धीरे ठंडी हो गई। उसके बाद चाँद ने उछाल मारी और जमीन से निकल भागा, मुद्दतों तक यहाँ कोई जानवर न था। तब लाखों, करोड़ों बरसों में, धीरे-धीरे जानदारों की पैदाइश हुई। दस लाख बरसों की मुद्दत कितनी होती है, इसका तुम्हें कुछ अंदाजा होता है? इतनी बड़ी मुद्दत का अंदाजा करना निहायत मुश्किल है। तुम अभी कुल दस बरस की हो और कितनी बड़ी हो गई हो! खासी कुमारी हो गई हो। तुम्हारे लिए सौ साल ही बहुत हैं। फिर कहाँ हजार, और कहाँ लाख जिसमें सौ हजार होते हैं। हमारा छोटा-सा सिर इसका ठीक अंदाजा कर ही नहीं सकता। लेकिन हम अपने आपको बहुत बड़ा समझते हैं और जरा-जरा-सी बातों पर झुँझला उठते हैं, और घबरा जाते हैं। लेकिन दुनिया के इस पुराने इतिहास में इन छोटी-छोटी बातों की हकीकत ही क्या? इतिहास के इन अपार युगों का हाल पढ़ने और उन पर विचार करने से हमारी आँखें खुल जाएँगी और हम छोटी-छोटी बातों से परेशान न होंगे। जरा उन बेशुमार युगों का खयाल करो जब किसी जानदार का नाम तक न था। फिर उस लंबे जमाने की सोचो जब सिर्फ समुद्र के जंतु ही थे। दुनिया में कहीं आदमी का पता नहीं है। जानवर पैदा होते हैं और लाखों साल तक बेखटके इधर-उधर कुलेलें किया करते हैं। कोई आदमी नहीं है जो उनका शिकार कर सके। और अंत में जब आदमी पैदा भी होता है तो बिल्कुल बित्ता भर का, नन्हा-सा, सब जानवरों से कमज़ोर! धीरे-धीरे हजारों बरसों में वह ज्यादा मजबूत और होशियार हो जाता है, यहाँ तक कि वह दुनिया के जानवरों का मालिक हो जाता है। और दूसरे जानवर उसके ताबेदार और गुलाम हो जाते हैं और उसके इशारे पर चलने लगते हैं। आगे की जानकारी ऑडियो के माध्यम से प्राप्त कीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.