अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

3:57 pm
कहानी का अंश... एक व्यापारी था। उसका एक बेटा था। पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी इसलिए व्यापारी ने अपने बेटे के पालनपोषण में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखी थी। पानी की तरह पैसा बहा दिया था। भाग्य भी उसका साथ दे रहा था। वह एक हाथ से कमाता था और दोनों हाथों से लुटाता था। बेटे को उसने बड़े लाड-प्यार से पाला था। उसे किसी चीज की कमी कभी महसूस ही नहीं होने दी। आखिर एक दिन ऐसा आया कि उस व्यापारी की म़ृत्यु हो गई। मरने से पहले उसने अपने बेटे को आशीर्वाद देते हुए कहा- बेटा, तेरा भाग्य बड़ा शक्तिशाली है। तू जिस चीज को भी हाथ लगाएगा, वह सोना हो जाएगी। यह मेरा आशीर्वाद है। ऐसा कहने के पश्चात वह भगवान को प्यारा हो गया। सचमुच उसके भाग्य का ही चमत्कार था कि व्यापारी के बेटे ने उसकी मृत्यु के बाद व्यापार में खूब लाभ कमाया। चारों तरफ से धन की वर्षा होने लगी। आगे क्या हुआ, क्या व्यापारी का बेटा इतने धन को पाने के बाद खुश था? उसे किस बात की चिंता होने लगी और उसने आगे क्या किया? इन सभी जिज्ञासाओं के समाधान के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.