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कहानी का अंश... एक था जंगल। उसमें एक घमंडी शेर रहता था। उसे अपने बल का बहुत घमंड था। अपने सामने वह जंगल के सारे प्राणियों को छोटा समझता था। एक दिन उसने घोषणा करवाई कि जंगल के सभी आदमी उसे आकर प्रणाम करें। अगले दिन एक-एक कर जंगल के सभी प्राणी उसके सामने आए और उसे प्रणाम करने लगे परंतु रानी चींटी को आने में देर हो गई। जब रानी चींटी ने आकर कारण बताया तो शेर गुस्सा हो गया और सभी के सामने उसे डाँटने लगा। बेचारी रानी चींटी उसकी डाँट सुनकर परेशान हो गई। इतने छोटे से अपराध को लेकर इतना अपमान सभी के सामने? उसने इसका बदला लेने का विचार किया। क्या किया होगा रानी चींटी ने? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए…

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