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1:35 pm
कहानी का अंश... मानपुर गाँव के पास एक बड़े से पेड़ में चिड़िया और उसका बच्चा रहते थे। वो दोनों रोज सुबह खाने की खोज में जाते और अनाज के दाने खा कर शाम तक आ जाते। एक दिन चिडि़या की तबीयत ठीक नही थी। इसलिए उसने अपने बच्चे से कहा ‘बेटा आज मेरी तबीयत अच्छी नही है। तुम्हें खाना खोजने अकेले ही जाना होगा और जब तुम खाना खा लोगे तो अपने मुंह में कुछ दाना रख कर मेरे लिए भी ले आना।’ बच्चा खाने की खोज में गाँव की तरफ उड़ चला। उड़ते-उड़ते उसे नीचे अनाज से लदा खेत दिखायी दिया। जब वो थोड़ा नीचे की ओर आया तो पाया कि एक आदमी उस खेत की रखवाली कर रहा था। बच्चा चुपचाप खेत के पास के पेड़ में बैठ कर उस आदमी के जाने का इंतजार करने लगा। बहुत देर हो गई लेकिन वह आदमी खेत से गया नही, शाम होने लगी। बच्चे को घर भी जाना था। बच्चा मन ही मन सोचता है कि ‘अब ज्यादा देर रुकना ठीक नही है, मां चिंता कर रही होगी। आज तो अनाज नही मिला। अब कल आऊंगा, घर लौटते समय रास्ते में थोड़ा बहुत जो भी अनाज मिलेगा उसे मां के लिए ले जाऊॅगां’। शाम में जब वह घर पहुँच तो मां ने उससे पूछा ‘बेटा इतनी देर कैसे हो गई?’ तब बच्चा मां को उस आदमी के बारे में बताता है। मां कहती है ‘अच्छा हुआ तुम खेत पर नही गये। ये इंसान बहुत खतरनाक होते हैं। पक्षियों को पिंजरें में कैद कर लेते हैं। तुम जितना खाना लाये हो उसे ही आज हम मिल बाँट कर खा लेते हैं। तुम उस खेत में कल चले जाना।’ आगे की कहानी ऑडियो के माध्यम से जानिए... कहानी पसंद आने पर आप लेखिका उपासना बेहार से संपर्क कर उन्हें कहानी के लिए बधाई भी प्रेषित कर सकते हैं। संपर्क - ई मेल-upasana2006@gmail.com

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