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कविता का अंश... भालू जी... ढोलक बाजे ढम ढम ढम नाचे भालू जी छम छम दो पैरों पर खड़ा हो गया ता-ता थैया ता-तिकड़म दरख़्त पर चढ़ जाए उल्टा खा के शहद ही लेता दम लेट जाए धरती पर लटपट आए न इसको कभी शरम घने बाल ज्यों ओढ़ा कम्बल सरदी का इसको ना ग़म..... ऐसी ही अन्य चुलबुली बाल कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए... संपर्क - मोबाइल : 09414514666

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  1. मेरे बाल गीतों के सुंदर वाचन के लिए श्रद्धेया भारती परिमल जी का बहुत बहुत आभार.......

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