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कविता का अंश... जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा था, माना वह बेहद प्यारा था, वह डूब गया तो डूब गया, अम्बर के आनन को देखो, कितने इसके तारे टूटे, कितने इसके प्यारे छूटे, जो छूट गए फिर कहाँ मिले, पर बोलो टूटे तारों पर, कब अम्बर शोक मनाता है, जो बीत गई सो बात गई। जीवन में वह था एक कुसुम, थे उसपर नित्य निछावर तुम, वह सूख गया तो सूख गया, मधुवन की छाती को देखो, सूखी कितनी इसकी कलियाँ, मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ, जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली, पर बोलो सूखे फूलों पर, कब मधुवन शोर मचाता है, जो बीत गई सो बात गई। इस अधूरी कविता को पूरा सुनने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...

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