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मई-जून गए आई जुलाई... कविता का अंश... मई-जून गए , आई जुलाई , खोलो पुस्तक, करो पढाई,| कान खोल कर यह सुन लें सब, खेल-कूद का समय नहीं अब ,| बस्ते से अब करो दोस्ती , बच्चों इसमें छुपी भलाई ,| होम-वर्क करना है भारी, अव्वल आने की तैयारी, लक्ष्य बना कर चलो अभी से, जीवन पथ है कड़ी चढाई ,| कम्प्यूटर मोबाईल छोडो, पुस्तक से अब नाता जोड़ो, फेस बुक व्हाट्स एप से दूर, कडुवी याद रखो सच्चाई ,| टीचर जी की मानो बात, उनसे जीवन में प्रभात ,| अनुशासन और सदाचार से, मिलती सदा सफलता भाई,| शिक्षा से भगता अंधियारा , ज्ञान दीप लाता उजियारा, छूना है आकाश अगर तो, श्रम की करो।कमाई ,| यही समय आगे बढ़ने का, प्रगति की सीढ़ी चढ़ने का, बीता समय नहीं फिर आता, करो न इसमें कोई ढिलाई ।

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  1. बहुत अच्छी रचना घनश्याम जी.
    एजुकेशन से सम्बंधित पोस्टो के लिए आप इस वेबसाइट को देख सकते है:



    "एजुकेशन टुडे"

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