अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

4:32 pm
टेसू राजा अड़े खड़े... कविता का अंश...
टेसू राजा अड़े खड़े माँग रहे हैं दही बड़े। बड़े कहाँ से लाऊँ मैं? पहले खेत खुदाऊँ मैं, उसमें उड़द उगाऊँ मैं, फसल काट घर लाऊँ मैं। छान फटक रखवाऊँ मैं, फिर पिट्ठी पिसवाऊँ मैं, चूल्हा फूँक जलाऊँ मैं, कड़ाही में डलवाऊँ मैं, तलवार सिकवाऊँ मैं। फिर पानी में डाल उन्हें, मैं लूँ खूब निचोड़ उन्हें। निचुड़ जाएँ जब सबके सब, उन्हें दही में डालूँ तब। नमक मिरच छिड़काऊँ मैं, चाँदी वरक लगाऊँ मैं, चम्मच एक मँगाऊँ मैं, तब वह उन्हें खिलाऊँ मैं। कविता का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.