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2:57 pm
कहानी का अंश... स्वेतलाना ने नृत्य करना शुरू किया तो सुंदर युवती फिर वहाँ आ गई। वे दोनों शाम तक नृत्य करती रहीं। अचानक युवती नृत्य करते-करते रूक गई। स्वेतलाना सन देखकर रोने लगी। सुंदरी ने उससे कहा - तुम रोओ मत। तुम अपना थैला मुझे दे दो। स्वेतलाना ने अपना थैला उसे दे दिया। युवती ने थोड़ी देर बाद उसे थैला वापस दे दिया और कहा कि देखो जो सन आज तुमने नहीं काता है, उसे मैंने कात दिया है। इस थैले को रास्ते में मत खोलना। घर जाकर ही देखना कि इसमें क्या है। यह कहते हुए सुंदरी अदृश्य हो गई। स्वेतलाना उस थैले को लेकर चल पड़ी। वह सोच रही थी कि क्या सचमुच इस थैले में सन काता हुआ होगा? उसने इतनी जल्दी कात लिया होगा? क्या उसने जिज्ञासावश वह थैला खोलकर देखा होगा? क्या वह थैला काते हुए सन से भरा होगा? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए सुनिए बाल कहानी - फिर गए दिन...

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