अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

1:59 pm
कविता का अंश... 1 बड़ी सुहानी धूप खिली है किरन परी भी आ धमकी है कॉलगेट कर सूरज आया दाँतों की पंक्ति चमकी है। 2 मेरी पेंसिल प्यारी-प्यारी बातें करती कितनी न्यारी कहे ठीक से पकड़ो भैया और बनाओ तितली, गैया। 3 देखो पुस्तक कितनी अच्छी मुझे बताए बातें सच्ची दुनिया भर की सैर कराए फूल-फलों से जी ललचाए। 4 आई होली रंग कमाल, निकली टोली लिए गुलाल। पाँव छुए फिर सभी बड़ों के; किया साथियों संग धमाल॥ 5 मुँह रँगा है पीला-काला, ले पिचकारी रंग जब डाला। झूठ-मूठ अम्मा गुस्साईं; खिल-खिल करती भागी बाला॥ 6 सुबह सुहानी कितनी अच्छी झटपट सीखें बातें सच्ची पढ़ें लिखें और हों गुणवान अपना भारत रहे महान। 7 जब से देखो आया जाड़ा बढ़ा दिया सूरज ने भाड़ा थोड़ी –थोड़ी धूप दिखाता झट से कोहरे में छिप जाता। ऐसी ही अन्य छोटी-छोटी कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.