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कविता का अंश... छ्म छ्म करती गाती शाम चांद से मिलने निकली शाम। उड़ती फिरती है फूलों में रंग-बिरंगी तितली शाम। आँखों में सौ रंग भरे आज की निखरी-निखरी शाम। यादों के साहिल पर आकर पल दो पल को उतरी शाम। ओढ के सिंदूरी आँचल हँसती है शर्मीली शाम। दिन का परदा उतर गया बड़ी अकेली लगती शाम। अलग-अलग हैं सबके ख़्वाब सबकी अपनी-अपनी शाम। ऐसी ही अन्य कोमल भावनाओं से सजी कविताएँ सुनने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए... सम्पर्कः देवमणि पांडेय Email : devmanipandey@gmail.com

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