अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

12:54 pm
कविता का अंश... सड़क पर मिले जो मुझे एक पैसा। मैं झट से उसे अपनी मुट्ठी में ले लूँ, मैं झट से उसे अपने भाई को दे दूँ। मैं झट से उसे अपनी माँ को दिखाऊँ। मैं सबको चलूँ ले के मेला दिखाऊँ। मैं राजा बनूँ और हाथी पे घूमूँ, मैं बागों में जाऊँ और फूलों को चूमूँ। मैं सेना से कह दूँ कि कर दे चढ़ाई, मैं दुश्मन से कह दूँ कि ले मौत आई। मैं जब चाहूँ घोड़ों का राशन बढ़ा दूँ, मैं जब चाहूँ चोरों को फाँसी चढ़ा दूँ। मैं वो पैसा पूरा का पूरा लुटा दूँ, मैं पैसा लुटाकर गरीबी मिटा दूँ। सड़क पर मिले जो मुझे एक पैसा। मैं उस एक पैसे से तोता खरीदूँ, मैं उस एक तोते को केले खिलाऊँ, मैं उस एक तोतो को जादू सिखाऊँ। वो जादू दिखाए, मैं डमरू बजाऊँ। मैं उस एक पैसे से नट को बुलाऊँ, वो रस्सी पे नाचे, मैं ताली बजाऊँ। एेसी ही चुलबुली कविता का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.