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दिव्यदृष्टि के श्रव्य संसार में आज आपको बताते हैं ज़ीरों के इतिहास के बारे में… हम सभी स्कूल या कॉलेज में ही नहीं रोज की दिनचर्या में भी गणित से अछूते नहीं हैं। रोज किसी न किसी चीज का हिसाब रखना ही होता है। इसके लिए आवश्यकता पड़ती है - अंकों की। अंकों की दुनिया में सबसे पहले आता है - ज़ीरो अर्थात शून्य। इसकी खोज किसने की ? इसकी खुद की कोई कींमत नहीं तो यह दूसरे अंकों को मूल्यवान बनाने में एक अहम भूमिका किस तरह निभाता है? इसे अन्य भाषाओं में और क्या कहा जाता है? भारत में इसके लिए कौन-सा शब्द है? क्या गणित की उपयोगिता इसके बिना कुछ भी नहीं? ऐसी ही जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए जानिए ज़ीरो का इतिहास ऑडियो की मदद से…

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