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कहानी का अंश… एक नगर में एक प्रसिद्ध गणितशास्त्री रहते थे। एक बार उन्होंने अंको की एक सभा का आयोजन किया। सभा में भाग लेने के लिए सभी अंक ठीक समय पर पहुँच गए, पर अंक शून्य कहीं दिखाई नहीं दिया। गणिताशास्त्री ने सोचा कि जरूर शून्य कहीं छिप गय होगा। इसलिए उन्होंने सभी अंको को शून्य को खोजने का आदेश दिया। सभी अंक शून्य की खोज में निकल गए। बहुत खोजने पर भी शून्य कहीं नजर नहीं आया। अचानक एक अंक की कीमत शून्य पर पड़ी। वह झाडियों में छिपकर बैठा हुआ था। उस अंक ने दूसरे अंकों को अपने पास बुलाया और शून्य दिखाया। फिर सभी मिलकर शून्य को गणितशास्त्री के पास ले गए। गणितशास्त्री ने शून्य को अपने पास बुलाया और उससे इस तरह सभा में भाग न लेने का कारण पूछा कि क्या बात है? तुम सभा में आने से डर क्यों रहे थे? शून्य ने जवाब दिया- सोचिए… शून्य ने क्या जवाब दिया होगा? गणितशास्त्री को लग रहा था कि शून्य सभा में आने से डर रहा था, तो फिर उन्होंने शून्य का डर किस प्रकार दूर किया होगा? आपकी तरह ही अन्य अंकों को भी शून्य के जवाब का इंतजार था। तो आइए अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए ऑडियो की मदद लेते हैं और सुनते हैं यह मजेदार कहानी, शून्य की कीमत…

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