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1:42 pm
प्रेरक प्रसंग का अंश…. पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने। उन्होंने आजादी की लड़ाई में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे कई बार जेल गए। उन्हें देश की कई जेलों में रखा गया। उनके जीवन का अधिकांश समय जेल में ही बीता। इसलिए वे घर-परिवार से दूर हो गए और अपने परिवार पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते थे। एक बार उनकी पत्नी श्रीमती कमला नेहरु गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। डॉक्टरों ने उन्हें क्षय रोग से पीडि़त घोषित कर दिया। जब भुवाली सेनिटोरियम में भर्ती करने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली, तो डॉक्टरों ने उन्हें इलाज के लिए स्विटज़रलैंड ले जाने की सलाह दी। पत्नी की बीमारी की खबर सुनकर जवाहरलाल नेहरु बहुत दुखी रहने लगे। वे जेल में थे। कुछ नहीं कर सकते थे। वे चाहते थे कि स्वयं उनकी देखरेख में पत्नी का इलाज करवाएँ। ऐसी परिस्थिति में उनके साथियों ने ब्रिटेश सरकार से अनुरोध किया कि वे जवाहरलाल को जेल से रिहा कर दे, ताकि वे अपनी पत्नी का इलाज करा सकें। ब्रिटिश सरकार ने उनके सामने यह शर्त रखी कि जवाहरलाल स्वयं पेरोल के लिए प्रार्थना पत्र लिखकर दे और इस दौरान राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने का वचन भी दें, तो वह उन्हें रिहा कर देगी। जवाहरलाल नेहरु उलझन में पड़ गए। एक तरफ पत्नी की बीमारी और एक तरफ देश के आत्म-सम्मान की बात। वे क्या करे? तब पत्नी कमला नेहरु ने उनका साथ दिया। किस तरह? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए…

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