अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

1:32 pm
कविता का अंश… खिलने लगे पलाश, तुम्हारे आने से, हर पल है मधुमास, तुम्हारे आने से। दिशा-दिशा कोयल-सी किलकारी भरती, लेता गगन उसांस, तुम्हारे आने से। आँखों ही आँखों में फागें लिखने के, होने लगे प्रयास, तुम्हारे आने से। सुधियों की यक्षिणी विकल थी, अब उसके मन की निकली फाँस, तुम्हारे आने से। वर्षों से तम का डेरा था, अब तो मुखरित हुआ प्रकाश, तुम्हारे आने से। जीवन गद्य बना था, पर उसमें लय की होने लगी तलाश, तुम्हारे आने से। गीत-अगीत लगे कल तक, पर अब उनमें घुलने लगी मिठास, तुम्हारे आने से। खिलने लगे पलाश, तुम्हारे आने से, हर पल है मधुमास, तुम्हारे आने से। ऐसी ही अन्य रसभरी कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए…

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.