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12:47 pm
कहानी का अंश... सुरजीत एक करोड़पति बाप का लड़की है। बहुत सुशील, चंचल तथा खूबसूरती की प्रतिमा। भुपिन्दर एक निर्धन घर का लड़का है। उसका बाप विकलांग है। उसकी माँ लोगों के घर के बर्तन साफ करके घर का गुजारा चलाती है। भुपिन्दर अपने माँ-बाप का इकलौता बेटा है। बेशक उसकी माँ बर्तन साफ करके घर का गुजारा चलाती है परंतु वह भुपिन्दर को शहर के एक अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है। भुपिन्दर पढ़ाई में बहुत होशियार है। प्रत्येक कक्षा में प्रथम आता है। भुपिन्दर तथा सुरजीत दसवीं तक एक ही कक्षा में पढ़ते आ रहे हैं। दोनों ही एक-दूसरे की ओर आकर्षित है। कक्षा में किसी न किसी बहाने सुरजीत उससे सवाल आदि समझने के बहाने बहुत समय तक बैठी बातें भी करती रहती है। दसवीं कक्षा का परिणाम निकलता है तो भुपिन्दर मैरिट में आता है परंतु सुरजीत द्वितीय दर्जे में पास होती है। सुरजीत भुपिन्दर को एक ही कक्षा में पढ़ने के लिए कहती है परंतु भुपिन्दर अपनी मजबूरी बताता हुआ कहता है कि सुरजीत मैं दसवीं से आगे नहीं पढ़ सकता क्योंकि मेरी माँ कहती है कि अब मैं कॉलेज का खर्च नहीं उठा सकती। तुम कोई नौकरी ढूँढ़ लो। परंतु सुरजीत उसे तसल्ली देते हुए कहती है कि भुपिन्दर, देख मैं तुझे सारा खर्चा दूँगी। पुस्तकें, वस्त्र और आर्थिक जरूरतें भी पूरी करूँगी। भुपिन्दर तू कॉलेज में दाखिला ले ले। तुम अपनी माँ को इस बात के लिए सहमत कर लो। यद्यपि भुपिन्दर, सुरजीत से इतने बड़े उपकार के नीचे अपने अस्तित्व को दबाना नहीं चाहता, लेकिन फिर भी सुरजीत के मोह में फँसा वह अपनी माँ को इसके लिए सहमत कर ही लेता है। अब सुरजीत तथा भुपिन्दर एक ही कॉलेज में दाखिला ले लेते हैं। दाखिला तथा पुस्तकों का सारा खर्च सुरजीत ही उठाती है। वह उसके लिए एक सुंदर घड़ी भी खरीद देती है। भुपिन्दर उससे सारी वस्तुएँ लेता तो है पर मन ही मन शर्मिंदगी भी महसूस करता है जैसे कि उसकी गुरबत खरीदी जा रही हो। परंतु सुरजीत के प्यार के कारण वह सब कुछ खुशी से स्वीकार कर लेता है। वह सुरजीत के प्यार के टुकड़े-टुकड़े नहीं करना चाहता। उसको पता है कि उसके इनकार के पत्थर उसके जज़्बात को किरचियों में बदल सकते हैं। अब दोनों प्री-मेडिकल में दाखिला ले लेते हैं। दोनों की पढ़ाई साथ-साथ चलती रहती है। साथ ही दोस्ती भी परवान चढ़ती है। आगे क्या होता है, यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए....

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