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रेल... कविता का अंश... आओ हम सब खेलें खेल एक दूसरे के पीछे हो लम्बी एक बनायें रेल । जो है सबसे मोटा-काला वही बनेगा इंजनवाला; सबसे आगे जायेगा, सबको वही चलायेगा । एक दूसरे के पीछे हो डिब्बे बाक़ी बन जायें, चलें एक सीधी लाइन में झुकें नहीं दायें, बायें । सबसे छोटा सबसे पीछे गार्ड बनाया जायेगा, हरी चलाने को, रुकने को झण्डी लाल दिखायेगा । जब इंजनवाला सीटी दे सब को पाँव बढ़ाना है, सबको अपने मुँह से 'छुक-छुक छुक-छुक' करते जाना है । ऐसी ही अन्य बाल कविताओंं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

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