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2:16 pm
कहानी का अंश... एक खूबसूरत गांव था। चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ। पहाड़ी के पीछे एक शेर रहता था। जब भी वह ऊंचाई पर चढ़कर गरजता था तो गांव वाले डर के मारे कांपने लगते थे। कड़ाके की ठंड का समय था। सारी दुनिया बर्फ से ढंकी हुई थी। शेर बहुत भूखा था। उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था। शिकार के लिए वह नीचे उतरा और गांव में घुस गया। वह शिकार की ताक में घूम रहा था। दूर से उसे एक झोपड़ी दिखाई दी। खिड़की में से टिमटिमाते दिए की रोशनी बाहर आ रही थी। शेर ने सोचा यहां कुछ न कुछ खाने को जरूर मिल जाएगा। वह खिड़की के नीचे बैठ गया। झोपड़ी के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज आई। ऊं...आं... ऊं...आं..। वह लगातार रोता जा रहा था। शेर इधर-उधर देखकर मकान में घुसने ही वाला था कि उसे औरत की आवाज आई- 'चुप रहे बेटा। देखो लोमड़ी आ रही है। लेकिन बच्चे पर उसकी बातों का कोई असर नहीं हुआ। फिर उसने उसे भालू का डर दिखाया, लेकिन बच्चा रोता ही रहा। वह भालू से भी नहीं डरा। अब तो शेर को बड़ी हैरानी हुई कि यह बच्चा तो किसी से भी नहीं डरता। तभी महिला ने कहा कि वो देखो शेर आ रहा है। वह खिड़की के पास बैठा हुआ है। शेर को ताज्जुब हुआ कि उसे कैसे पता चला कि मैं यहाँ पर हूँ? लेकिन बच्चे का रोना तो फिर भी चालू ही था। उसे तो शेर से भी डर नहीं लगा। आखिर ऐसा कैसे हुआ? आगे क्या हुआ? वह शेर क्या सचमुच बच्चे से डर गया? या बच्चा बाद में चुप हो गया? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...

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