अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

1:16 pm
मैं पिघलती दर्द की चट्टान हूँ... कविता का अंश... मैं पिघलती दर्द की चट्टान हूँ। उड़ रही है रेत जलती, मन मरुस्थल की धरा है। पास आकर छू न लेना, आग से अन्तर भरा है। मैं अषाढ़ी मेघ की, बरसात से अन्जान हूँ। दायरा छोटा रहा, अकुला उठीं साँसें घुटन में। क्या कहूँ इस पीर ने, इतने पसारे पांव मन में। मैं व्यथा का आसरा हूँ, पीर का ईमान हूँ। जूझता जीवन रहा है, मैं विरोधों में पली हूँ। दूर करने को अँधेरे, उम्र भर मैं तो जली हूँ। रात का अन्तिम प्रहर हूँ, भोर पर कुर्बान हूँ। थी कभी सपना किसी के , झील से गहरे नयन का। टूट कर गिर जाऊंगी, जैसे कोई तारा गगन का । मैं किसी की ज़िन्दगी का, आख़िरी अरमान हूँ। ऐसी ही अन्य कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए... संपर्क - ई-मेल - geetsarita@yahoo.co.in

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.