मंगलवार, 6 सितंबर 2011

बाहुबलियों पर कार्रवाई:सीबीआई का बाहुबल

डॉ. महेश परिमल
भाजपा के लिए अब मुश्किल भरे दिनों की शुरुआत हो गई है। अवैध खनन को संरक्षण देने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा को अपना पद छोड़ना पड़ा था, अब सीबीआई ने रेड्डी बंधुओं को गिरफ्तार कर पार्टी को परेशानी में डाल दिया है। अब तक भ्रष्टाचार को लेकर अपना परचम ऊँचा करने वाली भाजपा घिर गई है। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज का वरदहस्त रेड्डी बंधुओं पर है। यह सभी जानते हैं। पर यही रेड्डी बंधु भाजपा के गले की हड्डी बन गए हैं। फिर भी उसे यह उम्मीद है कि जर्नादन रेड्डी पाक साफ निकलेंगे। साथ ही यह कहने में नहीं चूकती कि पूरा मामला उनके निजी व्यवसाय से सबंधित है, न कि पार्टी से। भाजपा प्रवक्ता धनंजय कुमार का यह बयान हताशापूर्ण अधिक लगता है। क्योंकि जिसे सब जानते हैं, उन्हें वे पाक-साफ बताने पर तुले हुए हैं। अभी तो पूछताछ शुरू ही हुई है। संभवत: सीबीआई उनसे कुछ न उगलवा पाए। अपने बाहुबल से वे काफी कुछ ऐसा कर सकते हैं, जिससे उन पर किसी तरह की आँच न आए।
सीबीआई के मुताबिक जनार्दन रेड्डी के घर छापे के दौरान 1.5 करोड़ नकद जबकि उनके भाई श्रीनिवास रेड्डी के घर 30 किलो से अधिक सोना और 3 करोड़ से अधिक रुपए बरामद किए गए हैं। जनार्दन रेड्डी के घर छापे के दौरान सीबीआई ने उनका निजी हेलीकॉप्टर ‘रुक्मिणी’ भी जब्त किया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उनकी पत्नी लक्ष्मी अरुणा से भी पूछताछ की है। ओबुलापुरम माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) के प्रबंध निदेशक बी वी श्रीनिवास रेड्डी को भी गिरफ्तार किया है। इस कॉरपोरेशन के मालिक जनार्दन रेड्डी हैं। सीबीआई की 10 अफसरों की टीम ने सोमवार को तड़के रेड्डी के घर पर छापा मारा और उन्हें किसी अज्ञात जगह पर ले जाकर पूछताछ की जो रिश्ते में जनार्दन के भाई लगते हैं। श्रीनिवास रेड्डी से भी पूछताछ की गई है। छापे के दौरान सीबीआई को कई अहम सबूत मिले हैं। डीआईजी पी वी लक्ष्मी नारायण की अगुवाई में जांच एजेंसी की टीम रेड्डी बंधुओं को हैदराबाद ले गई है।
कर्नाटक में खनन के बेताज बादशाह माने जानेवाले रेड्डी बंधुओं पर गैरकानूनी तौर पर पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में खनन का काम किया है। पहले भी उनका नाम खनन से जुड़े कई मामलों में आ चुका है। कर्नाटक की राजनीति में अपनी धाक रखने वाले रेड्डी बंधुओं को कर्नाटक लोकायुक्त की रिपोर्ट में दोषी करार दिये जाने के बाद डी. वी. सदानंद गौड़ा के नेतृत्व में करीब एक महीने पहले गठित कैबिनेट से बाहर रखा गया था। पहले रेड्डी बंधु राजनीति से दूर रहे थे लेकिन बाद में वो बीजेपी में शामिल हुए। कुछ ही महीने पहले रेड्डी बंधुओं के नजदीकी माने जाने वाले एक मंत्री ने तत्कालीन मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। उल्लेखनीय है कि गत 27 जुलाई को सौंपी गई कर्नाटक लोकायुक्त की रिपोर्ट में रेड्डी बंधुओं को अवैध खनन के मामले में आरोपी बनाया गया था। रेड्डी बंधुओं के खिलाफ कार्रवाई पर कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्तजस्टिस हेगड़े ने कहा है, ‘ऐसा लगता है कि सीबीआई ने मेरी रिपोर्ट पर संज्ञान लिया है।’ भाजपा ने कांग्रेस पर सीबीआई को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। रेड्डी बंधुओं की गिरफ्तारी से ऐसा लग रहा है कि भाजपा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। एक दिन पहले ही रविवार को राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और रेड्डी बंधुओं के करीबी श्रीरामुलु ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। बताया जाता है कि श्रीरामुलु दोबारा मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज थे। लोकायुक्त की रिपोर्ट में खनन घोटाले में रेड्डी बंधुओं- जी. जनार्दन और जी. करुणाकार रेड्डी के साथ-साथ उन पर भी उंगली उठाई गई है।
बेल्लारी बंधु के तौर पर मशहूर जनार्दन, करुणाकर और सोमशेखर रेड्डी सुषमा स्वराज के करीबी माने जाते हैं। पहली बार सुषमा स्वराज और रेड्डी बंधुओं की नजदीकी 1999 में सामने आई थी, जब बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। आरोप है कि सुषमा के चुनाव का पूरा खर्च भी रेड्डी बंधुओं ने ही उठाया था। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित केंद्रीय उच्चाधिकार समिति (सीईसी) ने बेल्लारी जिले में अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहे अवैध खनन को उजागर किया। देश के चीफ जस्टिस एसएच कपाडिया को सौंपी अपनी अंतरिम रिपोर्ट में सीईसी ने कहा कि 2003 से 2009-10 के बीच वैध परमिट के बिना करीब 304.91 लाख मैट्रिक टन लौह अयस्क का खनन किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए सीईसी की अंतरिम रिपोर्ट पर जवाब मांगा।
रेड्डी बंधुओं के बारे में यह माना यह जा रहा है कि पिछले 10 वर्षो में गैरकानूनी रूप से खनन के कारोबार में रेड्डी बंधुओं ने करीब 4,000 करोड़ रुपए कमाए हैं। दक्षिण भारत में कर्नाटक में जब भाजपा की पहली स्वतंत्र सरकार बनी, तो इसमें रेड्डी बंधुओं का विशेष हाथ था। पूरे दक्षिण भारत में रेड्डी बंधुओं की छाप माइनिंग माफिया के रूप में है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में असंवैधानिक रूप से खनिजों का खनन कर रेड्डी बंधुओं ने अरबों रुपए इकट्ठे किए हैं। इसी संपत्ति के कारण उनका बाहुबल इतना बढ़ गया कि वे कर्नाटक की राजनीति को अपनी जेब में रखते रहें। इसलिए मुख्यमंत्री भी उनसे पंगा लेना नहीं चाहते। भाजपा भले ही भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर पूरे देश में आंदोलन करती रहे, पर कर्नाटक में इस मामले में उसकी फजीहत ही होती है।
अब तो सभी को पता चल ही गया है कि आंध्र प्रदेश में एक मध्यम वर्गीय पुलिस कांस्टेबल के परिवार में रेड्डी बंधुओं का जन्म हुआ। उसी बेल्लारी ने इन रेड्डी बंधुओं को साइकिल पर घूमते हुए देखा गया है। आज से 13 वर्ष पूर्व 1998 में रेड्डी बंधुओं ने कर्नाटक के बेल्लारी एक फाइनेंस कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी धन के दोगुना करने का लालच देती थी। इससे उन्होंने करोड़ों की ठगी की। 2003 में रेड्डी बंधुओं ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी के नाम पर 50 लाख रुपए का निवेश कर खदान का धंधा शुरू किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. राजशेखर रेड्डी का उन पर वरदहस्त था। परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री के पुत्र राजशेखर रेड्डी उनके कारोबार में सहभागी थे। इसी समय चीन के बीजिंग में ओलम्पिक खेलों के लिए लोहे की आवश्यकता हुई, इसके लिए रेड्डी बंधु सामने आए और उन्होंने चीन को लोहे की भरपूर आपूर्ति की। इससे सन् 2003 से लेकर 2008 के बीच रेड्डी बंधुओं ने करीब 4000 करोड़ रुपए अर्जित किए। इन रेड्डी बंधुओं पर यह आरोप है कि इन्हें आंध्र प्रदेश में खनिज काम के लिए 450 हेक्टेयर जमीन दी गई थी, इसका लाभ उठाते हुए उन्होंने आंध्रप्रदेश के पड़ोस में स्थित कर्नाटक के बेल्लारी जिले के जंगल की हजारों फीट जमीन पर कब्जा जमा लिया। फिर वहाँ से खनिज निकालने का काम शुरू किया। बेल्लारी जिले की एक माइनिंग कंपनी एमएसपीएल ने सरकार को आगाह किया कि रेड्डी बंधुओं ने उनकी जमीन पर असंवैधानिक रूप से खनन काम कर रहे हैं। पर रेड्डी बंधुओं की राजनीतिक पहुँच के कारण कुछ नहीं हो पाया। जंगल विभाग भी किसी की नहीं सुनता।
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार का वरदहस्त रेड्डी बंधुओं पर था। सरकार की तरफ से उन्हें हड़प्पा जिले में 24 हजार करोड़ रुपए की लागत से स्टल प्लांट स्थापित करने के लिए 10 हजार एकड़ जमीन दी गई। यही नहीं इसके बाद फिर 4 जार एकड़ जमीन उन्हें एयरपोर्ट के लिए दी। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि रेड्डी बंधुओं के कारोबार में जगनमोहन रेड्डी भी भागीदार हैं। रेड्डी बंधुओं को दी गई जमीन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की गई। इससे सुप्रीमकोर्ट ने माइनिंग की लीज के खिलाफ स्टे ऑर्डर दिया था, पर बाद में इसे रद्द कर दिया गया। रेड्डी बंधुओं पर यह भी आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक राज्य की सीमा पर घुसपैठ कर वहाँ भी असंवैधानिक रूप से खनन कार्य किया है। इसके लिए उन्होंने दो राज्यों के बीच लगने वाले खंभों को भी उखाड़ दिया है। पहले रेड्डी बंधु कांग्रेस के समर्थक थे। पर 1999 जब सोनिया गांधी और सुषमा स्वराज ने बेल्लारी से लोकसभा चुनाव लड़ा, तब से वे भाजपा केम्प में शामिल हो गए। इस चुनाव में सोनिया गांधी चुनाव जीत गई। पर अमेठी से भी जीतने के कारण उन्हें बेल्लारी की सीट छोड़नी पड़ी। इसका पूरा लाभ उठाते हुए रेड्डी बंधुओं की ताकत का इस्तेमाल करते हुए बेल्लारी लोकसभा सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा जमा लिया।
रेड्डी बंधुओं ने अपनी आर्थिक ताकत का उपयोग राजकीय ताकत बढ़ाने के लिए किया। सन् 2000 में सोमशेखर रेड्डी बेल्लारी के नगर निगम चुनाव जीता। बेल्लारी की राजनीति में आगे बढ़ने के लिए उन्होंने बी. श्रीरामुलु नामक दलित राजनेता की सहायता ली। इन्हें लोग चौथा रेड्डी बंधु के नाम से जानते हैं। सन् 2004 में करुणकर रेड्डी लोकसभा चुनाव बेल्लारी की सीट से जीता। उधर श्रीरामुलु विधानसभा की सीट से जीत गए। जनार्दन रेड्डी विधानपरिषद का चुनाव जीतकर एकएलसी बन गए। इस समय कर्नाटक में भाजपा-जेडी(यु)की गठबंधन सरकार थी। श्रीरामुलु उसके अध्यक्ष बन गए। इस समय जनार्दन रेड्डी ने कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी पर 150 करोड़ रुपए की रिश्वत माँगने का आरोप लगाकर बवाल मचा दिया। इसके चलते रेड्डी बंधु पूरे देश में पहचाने जाने लगे। 2008 में जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुए, तब रेड्डी बंधुओं ने बेल्लारी जिले की 9 में से 8 सीटों पर भाजपा को जीत दिलाई। इसके बाद सरकार बनाने के लिए उन्होंने निर्दलीय विधायकों के लिए खजाना ही खोल दिया। इसका असर यह हुआ कि दक्षिण भारत में भाजपा ने पहली बार सत्ता का स्वाद चखा। इस दौरान रेड्डी बंधुओं की ताकत इतनी बढ़ी कि उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को ब्लेकमेल करने लगे। 2009 में रेड्डी बंधुओं ने येदियुरप्पा से नाराज होकर उनकी सरकार ही गिराने की कोशिश की। तब सुषमा स्वराज ने बीच में आकर येद्दियुरप्पा की सरकार को बचा लिया। अब यदि रेड्डी बंधु यह कह दें कि वे कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं, तो संभव है उन पर लगाम ढीली पड़ जाए।
डॉ. महेश परिमल

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