गुरुवार, 14 जनवरी 2021

पतंग से सीखो अनुशासन

 









दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 13 जनवरी 2021 को प्रकाशित



लोकस्वर बिलासपुर में 14 जनवरी 2021 को प्रकाशित

गुरुवार, 31 दिसंबर 2020

जीसस के प्रवचनों में निहित अर्थो को समझें

 











मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

 

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 15 दिसम्बर 2020 को प्रकाशित

सुमीत की शरारत

ज उसका स्कूल का पहला दिन था।मैं उसके वापस लौटने का बेताबी से इंतजार कर रही थी।जैसे ही वह शाम को चार बजे घर लौटा कि मैंने उसे गले लगा लिया और उसका माथा चूमते हुए उसके दिन भर के क्रिया-कलापों के बारे में पूछा, और जानना चाहा कि आज स्कूल में क्या हुआ?

उस शरारती ने कुछ नहीं बताया। हाँ, इतना कहा कि एक लड़के ने उसे मारा। था़ेडी देर कुछ सोचकर फिर वह बोला- अमित, हाँ उसका नाम अमित है और वह बहुत शरारती लड़का है। उसने मुझे मारा और इसलिए टीचर ने उसे सजा भी दी।

मैंने पूछा- उसने तुम्हें क्यों मारा?

किंतु मेरे प्रष्न को जैसे उसने सुना ही नहीं और खेलने चला गया।

दूसरे दिन जब मैंने उससे फिर स्कूल के बारे में पूछा तो उसने बताया- आज फिर अमित ने शरारत की और टीचर के ऊपर चॉक फेंकी। टीचर ने सभी बच्चों से कह दिया कि कोई भी अमित के साथ नहीं खेलेगा, लेकिन सभी बच्चे उसके साथ खेले।

तीसरे दिन फिर उसने मुझसे अमित के बारे में बात की और बताया कि आज उसने लंच टाईम में एक लड़की को झूला झूलते हुए गिरा दिया और इससे उस लड़की को चोट लगी, खून भी निकला। टीचर ने उसे खूब डाँटा और एक चपत भी लगाई।

अब वह रोज मुझे अमित के बारे में कुछ न कुछ बताता ही रहता। मैं सुनना चाहूँ तो भी और न सुनना चाहूँ तो भी। कभी अमित ने किसी का लंच ले लिया, तो कभी टीचर की चेयर पर कचरा डाल दिया।करीब पंद्रह दिन तक लगातार उसके पास से अमित की शरारतों को सुनने के बाद मैं यह सोचने पर विवष हो गई कि इस शरारती लड़के का साथ सुमीत के लिए ठीक नहीं है।हमने गलती की जो उसे इस स्कूल में एडमिषन दिलवाया। अब मुझे जल्दी से जल्दी उसकी टीचर से मिलकर उसके विशय में बात करनी पड़ेगी। वरना अमित जैसे शरारती लड़के के साथ रहकर तो मेरा सुमीत भी बिगड़ जाएगा। किंतु क्या दूसरे स्कूलों में ऐसे शरारती लड़के नहीं होंगे? वहाँ भी तो यही परेषानी आ सकती है। नहीं, नहीं, ऐसा कैसे चलेगा? मुझे उसकी टीचर से मिलना ही होगा।

एक दिन उसने स्कूल से लौटकर अमित के बारे में एक नई बात बताई कि आज अमित ने कोई शरारत नहीं की और क्लास में भी शांत बैठा रहा। दूसरे दिन उसने फिर अमित की तारीफ करते हुए कहा कि आज उसने टीचर की टेबल से गिरे हुए सामान को अच्छी तरह जमा दिया, जिससे टीचर ने खुष होकर उसकी पीठ थपथपाई। इस तरह अब उसकी बातों से लगने लगा कि अमित एक अच्छा लड़का बन रहा है। फिर भी मैंने तय किया कि एक बार स्कूल जाकर उसकी टीचर से मिल ही लिया जाए।

शनिवार को पेरेन्ट्स मिटिंग पर मैं सुमीत के स्कूल गई और उसकी टीचर से भेंट की। टीचर ने सुमीत के बारे में बताते हुए कहा कि आपका लड़का पहले बहुत शरारती था, अब वह पहले से अच्छा बन गया है।वरना पहले तो मैं उसकी शरारतों से ही परेषान रहती थी।

मैंने सुमीत की सफाई देते हुए कहा कि वह तो एक सीधा-सादा लड़का है, किंतु आपकी ही क्लास का अमित बहुत शरारती लड़का है। मुझे डर है कि उसकी संगत में पड़कर सुमीत बिगड़ न जाए। कृपया उसे उस शरारती लड़के से दूर रखें।

अमित! ल्ेकिन मेरी क्लास में इस नाम का कोई लड़का तो है ही नहीं!

और अब चौंकने की बारी मेरी थी!!!

भारती परिमल

रविवार, 29 नवंबर 2020

अकेलेपन को भी भुलाने की कोशिश


दैनिक नवभारत रायपुर में 29 नवम्बर 2020 को प्रकाशित


28 नवम्बर 2020  को दैनिक जागरण के नेशनल एडीशन में प्रकाशित



 

गुरुवार, 12 नवंबर 2020

बच्चों के मन की बात सुनिए


दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 10 नवम्बर को प्रकाशित



25 अक्टूबर 2020 को अमर उजाला में प्रकाशित



दैनिक नवभारत में 8 नवम्बर 2020 को प्रकाशित









 

शनिवार, 24 अक्तूबर 2020

जिंदगी में जमीन से जुड़ाव है जरूरी

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 19 अक्टूबर 2020 को प्कारशित 





लोकस्वर बिलासपुर में 16 अक्टूबर 2020 को प्रकाशित





 

रविवार, 4 अक्तूबर 2020

भाषा की मोहक दुनिया

 

अमर उजाला  में 4 अक्टूबर 2020 को प्रकाशित आलेख




जनसत्ता में 1 अक्टूबर 2020 को प्रकाशित






19 सितम्बर 2020 को दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित














बिलासपुर से प्रकाशित लोकस्वर में आलेख


दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में 28 अगस्त 2020 को प्रकाशित

गुरुवार, 17 सितंबर 2020

किसी भी समाज की बदनसीबी हैं वृद्धाश्रम...

































 

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