शुक्रवार, 9 मार्च 2012

मेट्रोपोलिटन परिवार का एक अनोखा सदस्य: सुब्रमण्यम स्वामी


डॉ. महेश परिमल
देश का अब तक का सबसे बड़ा 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला हमारे सामने न आया होता, यदि इसके पीछे सुब्रमण्यम स्वामी न पड़े होते। यही स्वामी हैं, जिन्होंने वाजपेयी सरकार गिराई थी, आज वही मनमोहन सरकार को गिराने में लगे हैं।  गृह मंत्री पी. चिदंबरम के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। निचली अदालत ने 2जी मामले में चिदंबरम को क्लीन चिट दे दी थी। स्वामी ने इसी को चुनौती दी है। स्वामी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 2जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका को देखते हुए उन्हें भी आरोपी बनाया जाए। उन्होंने कहा है कि तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा के बराबर ही चिदंबरम भी गुनहगार हैं। चिदंबरम उस समय वित्तमंत्री थे। स्वामी के अनुसार स्पेक्ट्रम की कीमतें तय करने में तत्कालीन वित्त मंत्री ने अहम भूमिका निभाई थी। दूरसंचार कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी विदेशी फमोर्ं के हवाले करने की इजाजत देने में भी उनकी भूमिका थी। उन्होंने कहा कि चिदंबरम को आरोपी बनाए जाने के लिए निचली अदालत को कुछ सबूत सौंपे गए थे। वे अपने आप में पर्याप्त थे। तत्कालीन वित्तमंत्री चिदंबरम ने भ्रष्टाचाररोधी कानून और अन्य कानूनों के तहत अपराध किया है। स्वामी की याचिका इस साल चार फरवरी को विशेष सीबीआई अदालत ने खारिज कर दी थी।
आज जनता के सामने सुब्रमण्यम स्वामी प्रजा के सामने हीरो हों। भ्रष्टाचार को लेकर उनके द्वारा चलाए गए अभियान पर वे शहर-दर-शहर प्रवचन के लिए जा रहे हैं। गृह मंत्री चिदम्बरम के बाद अब उनके निशाने पर गांधी परिवार के दामाद राबर्ट बढेरा भी आ गए हैं। इसके पहले वे राहुल गांधी को बुद्धू भी कह चुके हैं। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी एक मेट्रोपोलिटन परिवार के सदस्य हैं। उनका  साला यहूदी, दामाद मुस्लिम, जीजा ईसाई और उनकी पत्नी पारसी है। उनकी माँ पद्मावती सुब्रमण्यम और पिता सीताराम सुब्रमण्यम दोनों ही आरएसएस के विचारों से प्रभावित हैं। जो कांग्रेसी स्वामी का पक्ष लेते हैं, उन्हें कांग्रेस विरोधी कहा जाता है। भाजपा में उनका नाम गर्व से लिया जाता है। आज सभी राजनैतिक दल उनसे दूर भाग रहे हैं। लेकिन जब उनका लाभ लेना होता है, तो सभी दल उनके करीब भी आ जाते हैं। उनका स्वभाव बड़ा गुम्फित है। उनके साथ यह कहावत प्रचलित है कि जिसके साथ वे बैठते हैं, धोखा उसे ही देते हैं। मजे की बात यह है कि जनसंघ की तरफ से ये राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने जिस तरह से अभियान चलाया है, उससे ऐसा लगता है कि हर राज्य में एक सुब्रमण्यम स्वामी होना ही चाहिए। पर वह आज के सुब्रमण्यम स्वामी की तरह कदापि नहीं होना चाहिए। क्योंकि इन्हीं पर आरोप है कि इन्होंने दो बार केंद्रीय सरकार को गिराया है। तीन बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले 72 वर्षीय  श्री स्वामी अभी भी ऊर्जावान हैं। चिदम्बरम के खिलाफ वे सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। हाल ही में हुए फ्रांस की डेसल्ट कंपनी को मिले 11 अरब डॉलर के फाइटर विमान के सौदे में भी स्वामी इटेलियन कनेक्शन देख रहे हैं। स्वामी की इन्हीं आदतों के कारण कोई भी उनसे अपना मेल-जोल नहीं बढ़ाना चाहता। वैसे देखा जाए, तो सुब्रमण्यम स्वामी देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राहुल गांधी से भी अधिक लोकप्रिय हैं। इसकी वजह यही है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अलख जगाई, उसी को अन्ना हजारे ने आगे बढ़ाया।
2 जी स्पेक्ट्रम कांड के पीछे जिस तरह से सुब्रमण्यम स्वामी पड़े,उससे यूपीए सरकार की नींद ही हराम हो गई। स्वामी की कोशिशें रंग लाई और देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया। स्वामी के कारण केंद्र सरकार के दो विकेट गिर गए। एक विकेट बमुश्किल से बच पाया। उन दो विकेटों में एक तो ए राजा और दूसरा कनिमोई का समावेश होता है। बमुश्किल बचे चिदम्बरम के लिए स्वामी आज भी आँख की किरकिरी बने हुए हैं। जिस तरह से आज अन्ना हजारे के प्रशंसकों से अधिक उनके दुश्मनों की संख्या अधिक है। ठीक इसी तरह स्वामी के प्रशंसकों से अधिक उनके दुश्मन हैं। राजनीति में उन्होंने कई लोगों को पटखनी दी है। स्वामी और जयललिता की दोस्ती बरसों पुरानी है। इतिहास बताता है कि एक बार उन्होंने जयललिता की मुलाकात सोनिया गांधी से करवाई थी। इस मुलाकात के बाद वाजपेयी की 13 माह पुरानी सरकार औंधे मुँह गिर गई थी। आज सुब्रमण्यम स्वामी भाजपा के साथ खड़े दिखाई देते हैँ। भाजपा उनका सम्मान कर रही हो। पर इन्हीं स्वामी ने अटल बिहारी वाजपेयी के कुँवारेपन पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए उन्हें पियक्कड़ कहा था। कर्नाटक की राजनीति से रामकृष्ण हेगड़े का नामोनिशान खत्म करने में इन्हीं स्वामी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही स्वमी चंद्रास्वामी के करीबी लोगों में से थे। नरसिम्हा राव के केबिनेट में स्वामी का समावेश चंद्रास्वामी के कहने पर ही हुआ था। युवातुर्कऔर जनता पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने स्वामी को 1970 में उन्हें पाटी्र से निकाल दिया था, पर बाद में स्वामी ने उन्हें मना भी लिया।
स्वामी का स्वीाव ही ऐसा है कि वे अपनी विशेष चुटीली टिप्पणियों से लोगों का मजाक उड़ाते रहते हैं। कई बार वे अतिशयोक्ति भी कर जाते हैं। उन्होंने ने ही 1999 में कहा था कि एक बार सोनिया गांधी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का ऑफर दिया था। पर उन्होंने इंकार कर दिया। बोलने में आक्रामक और स्वभाव से हँसमुख स्वामी अपने भाषण में छोटी-छोटी फुलझड़ियों से लोगों को गुदगुदाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक लेक्चर में कहा था कि तिहाड़ जेल के रसोइयों की यह शिकायत कर रहे हैं कि स्वामी केवल दक्षिण भारतीय को ही हमारे यहाँ भेजते हैं, इसलिए हमें केवल इडली-साँभर ही बनाने का ऑर्डर मिलता है। मैंने उन्हें कह दिया है कि वे अब इटेलियन फूड बनाना सीख लें, बहुत ही जल्द उन्हें इसके भी ऑर्डर मिलने लगेंगे। स्वामी भले ही वन मेन शो हों, पर इससे कोई इंकार नहीं कर सकता है कि उनकी चाहत केवल प्रधानमंत्री पद पाने की ही है। देखना यह है कि इसमें वे कहाँ तक सफल हो पाते हैं?
डॉ. महेश परिमल

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