मेरी तीसरी किताब छपकर आ गई है। पुस्तक
प्रकाशन, शाहदरा दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस किताब की प्रस्तावना प्रसिद्ध
आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह और फ्लैप प्रसिद्ध व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने
लिखी है।कवर पेज कुँवर रवींद्र ने तैयार किया है। छत्तीसगढ़
की माटी से कभी उऋण नहीं हो सकता, इसलिए इस बार बिलासपुर में अरपा के
किनारे डेढ़ वर्ष तक रहने पर रात में अरपा की सिसकियॉं सुनी, उसी पर आधारित
एक ललित निबंध को शीर्षक दिया है। इनमें से कई ललित निबंध भास्कर के
संपादकीय पेज पर प्रकाशित हो चुके हैं। जिस-जिस ने इस किताब के प्रकाशन में
मेरा सहयोग किया, उनका आभार।
शुक्रवार, 22 अगस्त 2014
मेरी तीसरी किताब आ गई
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