शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

ललित निबंध - उम्र पचपन याद आता है बचपन

डाॅ. महेश परिमल के इस निबंध में बचपन की शरारतों को पचपन के होने तक सहेजकर रखने का संदेश छिपा है। यह सच हे कि बचपन कभी लौटकर नहीं आता, पर उसकी यादें हमें कभी बूढ़ा नहीं होने देती। हम चाहें तो उम्र के हर पड़ाव पर इसे भरपूर जी सकते हैं और अपने बच्‍चों को भी इसे जीने की प्रेरणा दे सकते हैं -

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