बुधवार, 23 अप्रैल 2008

चेटिंग रूम में युवा मानसिकता को भ्रमित करने का प्रयास


डा. महेश परिमल
मात्र 23 वर्ष की उम्र और उसके पास है, एसेंट हुंडई. उसमें सवार होकर वह तेजी से भागी जा रही है. लांग ड्राइव पर निकली यह युवती मुम्बई से पुणे जाने वाले रास्ते पर तेजी से जा रही है, अचानक उसे कुछ विचार आता है और वह अपनी कार स्पीड के साथ रोड पर बने डिवाइडर से टकरा देती है. बुरी तरह से घायल अवस्था में उसे अस्पताल में दाखिल किया जाता है, कुछ स्वस्थ होने के बाद वह बताती है कि उसने जानबूझकर अपनी गाड़ी को डिवाइडर से टकरा जाने दिया था. आखिर उसे इस तरह का विचार क्यों और कैसे आया?
एक और घटना. मुम्बई की अंधेरी के एक निजी नर्स्ािंग होम में एक बेहोश महिला को भरती किया जाता है. वह अचानक बेहोश कैसे हुई, यह बताने के लिए कोई तैयार न था. उसके पति को भी पता नहीें था कि उसकी पत्नी अचानक कैसे बेहोश हो गई? उसके पति का कहना था कि वह कामकाजी महिला थी. आफिस से घर और घर से आफिस के अलावा वह और कहीं नहीं जाती थी. डाक्टर भी परेशान थे कि आखिर इस महिला को हो क्या गया है?
अचानक पति ने पत्नी के पर्स की जाँच की. पर्स में से उसे कुछ हतप्रभ करने वाले पत्र मिले! कैसे थे ये पत्र और क्या लिखा था इसमें? यह रहस्य ही रह जाता, यदि इस पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता. उस पत्र में यह लिखा था कि शांतिपूर्वक आत्महत्या किस प्रकार की जाए. पहली युवती भी इसी तरह के मेनिया का शिकार थी, और वह महिला भी कुछ इसी तरह की बीमारी से ग्रस्त थी. आइए जाने कि ये आखिर है क्या?
आजकल के युवाओं में इंटरनेट का क्रेज बढ़ रहा है. कहते हैं कि इंटरनेट ज्ञान का खजाना है. यह सच होते हुए भी आज गलत साबित हो रहा है. इंटरनेट से केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि बहुत कुछ ऐसा भी प्राप्त हो रहा है, जिसे पचा पाना बहुत ही मुश्किल है. चेटिंग रूम में आजकल जो अपसंस्कृति पनप रही है, उसे आज के अभिभावक न समझ पाएँ, पर इसके दुष्परिणाम जब सामने आते हैं, तब पता चलता है कि हमारे सामने ही हमारी संतान बरबाद हो रही थी और हम इसे समझ नहीं पाए. उपरोक्त दोनों ही उदाहरण में युवती और महिला को चेटिंग रूम में किसी मित्र ने शांति के साथ आत्महत्या करने की सलाह दी थी. जिसे उन्होंने सहजता के साथ स्वीकार भी कर लिया था. याने आजकल इंटरनेट पर शांति के साथ आत्महत्या कैसे करें, यह भी बताया जा रहा है. युवा इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं, क्योंकि आजकल तनाव के कारण बढ़ते ही जा रहे हैं. परीक्षा में विफलता, प्यार में धोखा, गृह कलह, मित्रों द्वारा घोखा, बुरी संगत में पड़कर कुछ गलत कर बैठना, यह सब आजकल के युवाओं के साथ होता रहता है. इसी के शिकार होते ही युवा आत्महत्या करने की सोचने लगते हैं.
इस अवस्था में यदि वे इंटरनेट का सहारा लेते हैं, तब उन्हें वहीं कैफे में कोई ऐसा मिल ही जाता है, जो उनकी मानसिक स्थिति को समझकर उनकी समस्या का समाधान आत्महत्या में बताता है. अच्छे संस्कारों के बीच पलने वाला युवा जब इसे एक पाप बताता है, तब वह आत्महत्या वाली साइट खोलकर बता देता है, जिसमें बताया गया है कि आत्महत्या करना पाप नहीं है, जीवन बेकार है, तुम इस धरती के लिए बोझ हो, मृत्यु के बाद क्या? इन सभी के बारे में इंटरनेट पर कई वेबसाइट हैं, जो बताती हैं कि आत्महत्या कैसे की जाती है. अपना मानसिक संतुलन खोने वाले युवाओं को पता ही नहीं चलता कि आत्महत्या के बारे में जानने के लिए जो साइट उन्होंने खोली है, वह साइट न होकर मौत का चेम्बर है. इन वेबसाइट पर आत्महत्या करने के विभिन्न उपाय बताए जाते हैं.
इंटरनेट कैफे में आकर युवा चेटिंग करते हैं और अपने अनजान मित्रों से आत्महत्या के बारे में खुलकर चर्चा करते हें. सामने वाला मित्र उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाता है. इस दौरान उसे बताया जाता है कि आत्महत्या करना बहुत ही आसान है. इससे शरीर को जरा भी तकलीफ नहीं होती, फिर कल का दिन तुम्हारे लिए तो बहुत ही बुरा है, कल तुम्हें जो पीड़ा होगी, उसे तुम बर्दाश्त नहीं कर पाओगे, इसलिए यदि अभी से ही आत्महत्या के लिए मन बना लो, तो कल का दिन आएगा ही नहीं. बस फिर क्या है, भटका हुआ युवा मन निकल पड़ता है खुदकुशी के लिए. आश्चर्य की बात यह है कि युवा मन की इस मानसिकता को कोई समझ नहीं पाता. घर में किसी को वक्त ही नहीं है कि उसके पास जाकर प्यार से बात करे. प्यार, अपनापन की चाहत में युवा मन को चेटिंग रूम में ही चैन मिलता है, जो उसे अंधेरी गुफा की ओर ले चलता है, जहाँ मौत के सिवाय कुछ नहीं होता.
ऐसा नहीं है कि इंटरनेट पर खुदकुशी करने के लिए प्रेरित करने वाली साइट्स ही हैं. snehindia.org, www.education.vsnl.com, www.cbnindia.com, www.psycom.net/depression ऐसी वेबसाइट्स हैं, जो सकारात्मक विचार देती हैं. इन साइट्स में जीवन को जीने के लिए विभिन्न उपाय बताए जाते हैं. पर सच तो यह है कि आत्महत्या के लिए प्रेरित करने वाली साइट्स की अपेक्षा इस तरह के सकारात्मक विचारों वाली साइट्स बहुत ही कम हैं. अब यह अभिभावकों पर निर्भर करता है कि वे अपने बच्चों की तमाम गतिविधियों को ध्यान से देखें कि उनकी संतान क्या करती हैं. उनके दोस्त कौन-कौन हैं, वे किस तरह का विचार रखते हैं, वे जो कुछ पढ़ते हैं, उन किताबों में किस तरह की जानकारियाँ हैं, अपने साथियों के साथ वे किस तरह की फिल्में देखते हैं, कंप्यूटर पर किस तरह की साइट्स पर जाकर ज्ञान प्राप्त करते हैं? यदि इन बातों का पता चल जाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी संतान क्या कर रही है? इसके बाद अभिभावक ही उन्हें राह बताएँ कि उन्हें क्या करना है? यदि संतान भटक रही है, तो उसे उपरोक्त सकारात्मक विचारों वाली साइट्स से भी परिचय कराएँ, ताकि संतान कुछ अच्छा भी सोचे.
धन बटोरना चाहते हैं, इसलिए अभी उनके पास अपनी संतान के लिए वक्त नहीं है, तो उन्हें समझ जाना चाहिए कि जब तक वे संतान के लिए धन इकट्ठा करेंगे, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. उस धन का इस्तेमाल करने के लिए वही संतान उनके पास नहीं होगी. या तो वह अपराध की दुनिया में चली गई होगी, या फिर चेटिंग रूम में उन्हें आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने वाला कोई साथी मिल गया होगा, जिसे वे अंजाम दे चुके होंगे.
इसलिए अभिभावकों की सतर्कता बहुत ही आवश्यक है. यदि उनके पास वक्त नहीं है, तो निश्चित जानें कि कल उनके बच्चों के पास भी अपने अभिभावकों के लिए वक्त नहीं रहेगा. इसे अभिभावक यदि आज ही समझ लें, तो बहुत ही अच्छा होगा, क्योंकि कल उन्हें देखने वाला कोई नहीं होगा. उनके पास वक्त होगा, लेकिन बच्चे व्यस्त होंगे. तब वे अपने झुर्रियों वाले कँपकँपाते हाथों से अपने बच्चों के लिए कोई इबारत नहीं लिख पाएँगे.
डा. महेश परिमल

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