बुधवार, 14 अप्रैल 2010

दरकने लगीं आस्था की दीवारें



डॉ. महेश परिमल
एक लम्बे विवाद के आद अंतत: सानिया मिर्जा शोएब मलिक की हो गईं। एक तरह से यह कहा जा सकता है कि एक भारतीय युवती पाकिस्तानी बन गईं। पिछले एक पखवाड़े में इस शादी के पहले कई बवंडर आए। जिसका दोनों ने मिलकर सामना किया। पर अब हालात बदल गए हैं। इस बीच कई ऐसी खबरें आईं, जिसमें सानिया की सफलता से प्रभावित होकर जिन्होंने अपनी बेटियों का नाम सानिया रखा था, वे अब स्कूलों में यह आवेदन कर रहे हैं कि उनकी बेटी का नाम बदल दिया जाए। इसी तरह जिन्होंने अपनी संस्था का नाम सानिया के नाम पर रखा था, उन्होंने भी अपनी उसका नाम बदलकर साइना नेहवाल रख दिया है। इस तरह से सानिया को लेकर जो इज्जत देश में थी, वह विवादों के चलते दरकने लगी। आस्था का दरकना शायद इसे ही कहते हैं।
बात यह नहीं है कि सानिया ने शादी कर ली। बात यह है कि सानिया ने एक झूठे व्यक्ति से शादी की है। ‘सैंया झूठों का बड़ा सरताज निकला’ आएशा के मामले में शोएब ने न जाने कितने झूठ का सहारा लिया। जिसे वे शुरू से नकारते रहे, बाद में उसे ही स्वीकारा। यही नहीं अपने पिता के नाम में भी उनसे गफलत हुई। बाद में उसे अपनी भूल बताया। सानिया ने जन सनसनाते शॉट्स से अपनी धाक जमाई, उसी सनसनाते शॉट ने उसकी छवि को धूमिल कर दिया। शोएब का पाकिस्तानी होना कतई गलत नहीं है, बल्कि उनका मैच फिक्सिंग का आरोपी होना महत्वपूर्ण है। केवल झूठ ही नहीं, शादी से पहले ससुराल आकर रहना, घोषित तारीख के पहले शादी कर लेना जैसी कुछ बातें हैं, जो एकबारगी सानिया के प्रशंसकों को अचंभे मे डालती है। सुदूर गाँव में बसने वाले लोगों ने भी महसूस किया कि हिंदू होते हुए भी उन्होंने अपनी बेटी का नाम सानिया रखा, जो गलत था।
जो खिलाड़ी होते हें, उन्हें जीवन में एक बार तो ‘हू¨टग’ का सामना करना ही पड़ता है। सचिन तेंदुलकर को भी कई बार हूटिंग का सामना करना पड़ा। पर उन्होंने बिना प्रतिवाद किए अपने खेल से लोगों के दिल में जगह बना ली। तमाम विवादों के बाद भी सानिया ने अपने खेल से लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। पर कुछ ही वर्षो में उसका खेल ढलान पर आने लगा। ऊँगली की चोट की वजह से उसका खेल प्रभावित हो रहा था। अंतत: उसने सोचा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। सोहराब से सगाई के बाद भी लोगों को इस बात की खुशी थी कि वह आखिर रहेंगी, तो भारत में ही। इसलिए लोगों को उतना बुरा नहीं लगा। पर जब शोएब मलिक से उसकी शादी की बात चली, तो फिर कई विवादों ने उन्हें घेर लिया। इस बीच शोएब की कई गर्ल फ्रेंड सामने आ गई। आयशा का नाम तो और भी सुखिर्यों में आ गया, जिससे शोएब की शादी हुई थी। आखिरकार सानिया ने 12 अप्रैल को हैदराबाद में शोएब मलिक से शादी कर ली।
सेलिब्रिटी की शादी हो या प्यार, सभी पर सबकी नजरें रहतीं हैं। अब लोग सानिया-शोएब का दाम्पत्य जीवन लंबे समय तक टिक पाएगा या नहीं, इस पर कयास लगाने लगे हैं। कोई सानिया पर देशद्रोही होने का इल्जाम लगा रहा है तो कोई इसे भारत और पाकिस्तान के बीच एक प्रेम के पुल की नींव कह रहा है। कुछ दीवाने अपने टूटे दिले के साथ सानिया की शादी का शोक मना रहे हैं। पर सवाल यह है कि क्या ये रिश्ता टिक पाएगा? यह पहली बार नहीं है कि सरहदों के आर-पार दो दिल मिल रहे हैं। इससे पहले भी भारत और पाकिस्तान के बीच इस तरह का प्यार पनप चुका है। आज से 25 साल पहले एक पाकिस्तानी पत्रकार का दिल एक भारतीय हसीना पर आया था। उस समय पाकिस्तान में एक इंडियन के लिए वीजा पाना इतना मुश्किल नहीं था जितना कि आज।
पाकिस्तान के अधिकतर लोग मानते हैं कि सीमा पार विवाह से उनके देश और भारत और के बीच खाई पाटने में मदद मिल सकती ह,ै लेकिन उनका मानना है कि सानिया मिर्जा और शोएब मलिक की शादी ज्यादा दिन तक नहीं टिकी रहेगी। पाकिस्तान के एलीट स्कूल की सेवानिवृत प्रधानाध्यापिका आयशा अंसारी ने कहा मुझे लगता है कि शोएब मलिक और सानिया मिर्जा की जोड़ी बेमेल है, जिसमें सानिया बहुत अच्छी है। यह बुरा सौदा है। अंसारी ने दावा किया कि ऐसा मानने वाली वह अकेली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से पाकिस्तानियों का मानना है कि यह शादी ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी। यह बहुत मुश्किल है। अंसारी हालांकि भारत और पाकिस्तानियों के बीच वैवाहिक संबंधों की पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की शादियाँ होनी चाहिए। यह दोनों देशों के लिए अच्छा है। इससे मिथक टूटेंगे, डर दूर होगा और लोग एक-दूसरे के करीब आएँगे। अधिकतर पाकिस्तानी शादी का मामला काफी जटिल होता है। आईटी से जुड़ी सादिया खान ने कहा कि आपसी आकर्षण, शादी अच्छी बात है, लेकिन यदि शादी नहीं चल पाई तो क्या होगा?
अंसारी ने कई साल पहले भारत से यहाँ आकर पाकिस्तानी से शादी की थी। दुर्भाग्य से उनका दांपत्य जीवन अधिक दिन तक नहीं चल पाया। उनकी लड़की ने इसके बाद पाकिस्तानी के बजाय भारतीय से शादी करना उचित समझा। अंसारी को हालांकि कई साल पहले खास वीजा पर भारत में रहने की अनुमति मिल गई थी, लेकिन वह पाकिस्तान लौट आई और अब अपनी सारी जिंदगी पाकिस्तानी के तौर पर बिताना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की शादियों में कुछ भी गलत नहीं है। राजनीतिक स्थिति भले ही अलग है। वे उन लोगों को दोहरी नागरिकता क्यों नहीं दे देते जो शादी के लिए सीमा पार जाकर शादी करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मेरे कई विद्यार्थियों की शादी भी लंबे समय तक नहीं चली, इसलिए केवल भारत और पाकिस्तान के जोड़ों के बीच होने वाली शादी ही समस्या नहीं है। यह हर जगह जटिल मामला है। अंसारी का मानना है कि तीसरे देश का विकल्प यानी सानिया और शोएब के मामले में शादी के बाद दुबई में बसने के फैसले भी समस्या हल नहीं होगी। आप अपने परिवार से दूर चले जाते हो। मुझे नहीं लगता कि इससे काम बनेगा। वर्तमान परिस्थितियों में अधिकतर पाकिस्तानियों का मानना है कि सानिया और शोएब का दांपत्य जीवन लंबे समय तक चलने की संभावना कम है।
सरफराज की गुगली:- पूर्व पाकिस्तानी Rिकेटर सरफराज नवाज ने शोएब मलिक और टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की शादी को लेकर जारी विवाद में एक और गुगली फेंकी है। सरफराज ने शोएब के चरित्र को शक के घेरे में खड़ा करते हुए उन पर मैच फिक्सर होने का संगीन आरोप लगाया है। सरफराज के मुताबिक शोएब घरेलू Rिकेट में मैच फिक्सिंग करते रहते हैं। एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में सरफराज ने कहा कि भारत की टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी खिलाड़ी शोएब मलिक का निकाह सिर्फ एक बड़ा सौदा है। इसका मकसद सिर्फ पैसा है और कुछ नहीं। सरफराज का कहना है कि शोएब ने सानिया पर 18 लाख डॉलर खर्च किए हैं। कुछ ही दिनों में लोग सानिया के टेनिस मुकाबलों के फिक्स होने की खबर भी सुनेंगे। शोएब एक धोखेबाज हैं और कुछ नहीं। हैरत की बात यह है कि सरफराज के इतने संगीन आरोपों पर ना तो शोएब ने ना ही उनके किसी परिजन ने प्रतिRिया व्यक्त की है।
डॉ. महेश परिमल

2 टिप्‍पणियां:

  1. Contrary to your comments, the wedding of Sania and Shoeb can be considered a good and heart warming gesture be sound relations between the two neighbours, India & Pakistan. But because of our negative mentality we ignore the good message from any event and love to dig out some hatered and bad feelings.
    No sensible human being is hurt by this wedding and no such instances of changing the names of daughters has come to notice.

    This post is really a sincere work to keep us indians in the filth of hatered and bad feelings for others.

    उत्तर देंहटाएं

Post Labels