बुधवार, 6 फ़रवरी 2008

राजनीति की धूप में झुलसती छाँव



डॉ. महेश परिमल
हाल ही में एक ही जाति की दो विरोधाभासी खबरों ने ध्यान आकृश्ट किया।पहली खबर तो यही थी कि उत्तर प्रदेष की मुख्यमंत्री ने अपनी 52 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की घोशणा की।दूसरी खबर यह है कि पटना के एक्जीबिषन रोड पर स्थित पंजाब नेषनल बैंक में आज भी हमारे पहले राश्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का खाता है, जिसमें मात्र 1,432 रुपए ही जमा थे।राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु के 44 वर्श बाद बैंक ने उनके बचत खाता क्रमांक 3098 को अभी तक बंद नहीं किया है।इन 44 वर्शों में उनके परिवार ने भी इस खाते से किसी प्रकार का लेन-देन नहीं किया है।स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद का यह खाता ही उनकी प्रामाणिकता और सार्वजनिक पारदर्षिता को स्पश्ट करता है।उल्लेखनीय है कि इन दिनों राश्ट्रपति का वेतन एक लाख रुपए करने के आवेदन पर संसद में चर्चा चल रही है।ये आज और कल की राजनीति का एक नमूना है, जहाँ एक ओर देष सेवा और त्याग है, तो दूसरी तरफ है केवल लूट।
आज राजनीति कितनी फलदार हो गई है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजनीति से जुड़ा छोटे से छोटा कार्र्यकत्ता भी लाखों की सम्पत्ति का मालिक है।अब मायावती को ही ले लो, एक दषक पहले ही दिल्ली कार्पोरेषन की एक स्कूल की षिक्षिका के रूप में अपनी जिंदगी की षुरुआत करने वाली ये आज घोशित रूप से 52 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की मालिक है।षिक्षिका रहते हुए उन पर दलित नेता कांषीराम का वरद हस्त प्राप्त हुआ, फिर तो जिंदगी मानों दौड़ने लगी और देखते ही देखते दलितों की मसीहा बन गई।2004 में मायावती ने जब लोकसभा का चुनाव लड़ा, तब उन्होंने चुनाव आयोग के सामने अपनी कुल सम्पत्ति 11 करोड़ रुपए घोशित की थी।अभी जब उत्तर प्रदेष विधान परिशद के चुनाव के नामांकन के समय उन्होंने अपनी कुल सम्पत्ति 52.5 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की घोशणा की।इस तरह से सत्ता में न रहते हुए भी उनकी सम्पत्ति में कुल 41.5 करोड़ का जंगी इजाफा हुआ।इस इजाफे पर उनका कहना था कि इसके लिए केंद्र की एनडीए सरकार जवाबदार है।इसे स्पश्ट करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र के इषारे पर जब उनके दिल्ली स्थित निवास पर सीबीआई ने छापा मारा, तो सीबीआई को मेरे घर से कुछ नहीं मिला।इस छापे के बाद पार्टी के कार्र्यकत्ताओं को लगा कि मेरे पास कुछ भी नहीं है।इससे सबने मुझे धन तोहफे के रूप में देना षुरू किया।इन कार्र्यकत्ताओं का कहना था कि इस रकम का उपयोग वे दिल्ली में बंगला बनाने या फिर निजी काम के लिए कर सकती हैं।मायावती का यह खुलासा किसी के गले नहीं उतर रहा है।
2004 में जब मायावती ने लोकसभा के चुनाव के लिए षपथपत्र दाखिल किया, तब उन्होंने बताया था कि उनके पास दिल्ली के पॉष इलाके इंद्रपुरी में चार फ्लैट हैं, जिनकी कीमत सवा करोड़ थी, अब उन्होंने सरदार पटेल मार्ग पर एक खुद का बंगला होने की घोशणा की है, इसकी कीमत 18 करोड़ रुपए ऑंकी गई है।वास्तविकता यह है कि एक ही बंगले की कीमत 50 करोड़ रुपए है।मायावती के पास दिल्ली में तीन कामर्षियल प्रापर्टी भी है।जिसकी कीमत करीब 18.8 करोड़ रुपए है।मायावती ने अपनी जितनी सम्पत्ति की घोशणा चुनाव आयोग के सामने जाहिर की है, उतनी ही सम्पत्ति आयकर के सामने भी की है।जब आयकर विभाग ने इस पर अपनी जाँच की, तब उन्हें कुल सम्पत्ति 52 करोड़ रुपए से अधिक की लगी और विभाग की ओर से मायावती को नोटिस भेजा गया।नोटिस के जवाब में मायावती ने आयकर विभाग को लिखा कि जो अतिरिक्त सम्पत्ति है, उसका भी आयकर देने पर सहमति जताई।
हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इतने किस्मतवाले नहीं हैं कि कार्र्यकत्ताओं के दान से करोड़पति हो जाएँ।सन 2004 के चुनाव के समय उनके पास केवल 59 लाख रुपए की सम्पत्ति थी।वाजपेयी जी के जूनियर लालकृश्ण आडवाणी के पास उस समय 2.1 करोड़ रुपए की सम्पत्ति थी।महाराश्ट्र के रसूखदार मंत्री षरद पवार को धन कुबेर कहा जाता है, पर उनके पास भी कानूनन रूप से मात्र 3.6 करोड़ रुपए की ही सम्पत्ति है।इसी तरह रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के पास 23.7 लाख रुपए और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के पास 37 लाख रुपए की सम्पत्ति है।हरियाणा के पूव मुख्यमंत्री ओमप्रकाष चौटाला ने चुनाव आयोग के सामने अपनी कुल सम्पत्ति 4.80 करोड़ और पत्नी की 1.20 करोड़, इस तरह से कुल 6 करोड़ रुपए की सम्पत्ति की घोशणा की थी।जब 4 मई 2006 को सीबीआई ने चौटाला के 24 स्थानों पर छापा मारा, तो वहाँ कुल 1,467 करोड़ रुपए की सम्पत्ति का खुलासा हुआ।उत्तर प्रदेष के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने हाल ही में विधान सभा के चुनाव के समय खुद के पास मात्र 3 करोड़ रुपए की सम्पत्ति होने का खुलासा चुनाव आयोग के सामने किया।इनके पास कुल 100 करोड़ की सम्पत्ति होने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।इसकी जाँच सीबीआई कर रही है।पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाष सिंह बादल जब सत्ता में नहीं थे, तब काँग्रेस के मुख्यमंत्री केप्टन अमरेंद्र सिंह ने उन पर अधिक सम्पत्ति होने का मुकदमा चलाया था।इस मामले की जाँच पंजाब विजीलेंस ब्यूरो द्वारा की गई थी।इस जाँच में पाया गया कि बादल के परिवार के पास 4,326 करोड़ रुपए की सम्पत्ति थी।इसी तरह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि के पास 26.5 करोड़ रुपए की और भूतपूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने 24.6 करोड़ की सम्पत्ति होने की घोशणा की है।इस तरह से देखा जाए तो हमारे प्रधानमंत्री के पास केवल चार करोड़ रुपए की ही सम्पत्ति है।उनकी यह सादगी भी हमारे राजनेताओं को किसी प्रकार की सीख नहीं दे पा रही है।
राजनीति में एक तरफ धनकुबेरों की बड़ी जमात है, तो दूसरी तरफ इन्हें धनपति बनाने वाले और अपना कीमती वोट देने वाले करोड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं है।यही कारण हे कि हमारे देष में धनपतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसका सर्वेक्षण तो हो रहा है, पर कितने परिवार गरीबी से जूझ रहे हैं, इसका सर्वेक्षण होता भी है या नहीं? यदि होता भी होगा, तो इससे क्या फर्क पड़ता है।एक आम आदमी अपनों के बीच ही कुछ विषेशताओं के साथ चुपके से खास बन जाता है और खास बनने के बाद बड़ी तेजी से प्रगति करते हुए धनकुबेरों की जमात में षामिल हो जाता है।यही नहीं अपनी सात पीढ़ियों के लिए भी इंतजाम कर जाता है।दूसरी तरफ राजेंद्र प्रसाद जैसे लोग भी इसी राजनीति में रहे, जो जाते-जाते अपने खाते में एक छोटी सी रकम ही छोड़ गए।क्या इससे नहीं लगता कि आज की राजनीति की धूप में ईमानदारी की छाँव झुलस रही है?
 डॉ. महेश परिमल

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