शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

वो जी उठा, हम बचा नहीं पाए

सियाचीन की बर्फीली वादियों में पूरे 6 दिन तक 35 फीट बर्फ के नीचे दबे रहे हनुमनथप्पा ने मौत को अपने पास तक नहीं आने दिया, लेकिन बाहर निकाले जाने के बाद ये बहादुर इलाज के दौरान जिंदगी की लड़ाई हार गया। हम उसे बचाने में नाकाम रहे। 11 फरवरी 2016 को डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कवि हर‍ि ओम पवार ने श्रद्धांजलि स्वरूप जो कविता लिखी है, वह यहॉं प्रस्तुत है -

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " स्वधर्मे निधनं श्रेयः - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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